Friday, November 25, 2016

Buddha जिंदगी हिम्मत हारने का नाम नहीं है दोस्त, बल्कि कोशिश करने का पैगाम है:प्रेमानंद


-फूड पाइप के जरिए गले से बोलने वाले देश के पहले व्यक्ति हैं प्रेमानंद
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
जिंदगी और मौत तो ऊपर वाले के हाथ में होती है जहांपनाह। जी हां, यह उसी आनंद फिल्म का डायलॉग है, जिसे सुनने या देखने के बाद हर दर्शक अपनी सांसें थामे मृत कलाकार में जिंदगी ढूढ़ने लगता है। जरा सोचिए, अगर रियल लाइफ में भी कुछ ऐसा हो तो क्या हो। आज भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो मौत से दो-दो हाथ कर जिंदगी को ऐसे जिये जा रहे हैं, जैसे अभी भी उनमें जिंदगी बाकी है। छोटी-मोटी परेशानियों से घबराकर खुदकुशी कर लेने वाले लोगों के लिए ऐसे लोग एक सीख हैं, एक प्रेरणा हैं, जो यह बता रहे हैं कि जिंदगी हिम्मत हारने का नाम नहीं है दोस्त, बल्कि कोशिश करने का पैगाम है, फिर देखना कितनी हसीं है यह जिंदगी..
गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए प्रेमानंद जी यही संदेश दे रहे हैं। वोकल कार्ड (गले में आवाज का बाक्स) कैंसर की सर्जरी कराने वाले पूर्व वरिष्ठ अधिकारी प्रेमानंद देश के पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने सर्जरी के बाद फूड पाइप के जरिए बोलने की ट्रेनिंग के लिए जापान गए थें और आवाज बॉक्स निकालने के बावजूद फूड फाइप (खाने की नली) के जरिए गले से बोलने की शुरूआत की। 82 वर्षीय प्रेमानंद आज देश में हजारों वोकल कार्ड कैंसर मरीजों को सर्जरी के बाद सामान्य जीवन जीने की ट्रेनिंग दे चुके हैं। 

वोकल कार्ड कैंसर के 90 फीसदी मरीजों में धूम्रपान है मुख्य वजह-
देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स में वर्ष 1961 में वॉयस क्लिनिक शुरू करने वाले वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.बीएम एंब्रॉल कहते हैं कि वोकल कार्ड कैंसर (गले में आवाज बॉक्स) की चपेट में आने वाले लगभग 90 फीसदी मरीज बीमारी से पूर्व धूम्रपान अथवा तंबाकू का सेवन करते थें। गले के कैंसर (आवाज बॉक्स) से पीड़ित मरीजों के जीवन को बेहतर करने के लिए डॉ.एब्रॉल ने लैरिंगटॉमी क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना की। डॉ.एब्रॉल ने ही वर्ष 1981 में प्रेमानंद के गले की सर्जरी की थी।
1957 से सिगरेट पीते थें प्रेमानंद-
प्रेमानंद कहते हैं कि वह सीनियर ऑडिट ऑफिसर थे और वर्ष 1957 से ही सिगरेट पीते थें, वर्ष 1979 में उन्हें इस बीमारी का पता चला और वर्ष 1981 में उन्होंने सर्जरी कराई और 1985 में फूड पाइप के जरिए गले से बोलने की ट्रेनिंग (इसोफिगर स्पीच  थिरेपी) के लिए जापान गया और 3 महीने की ट्रेनिंग के बाद भारत आया। उन्होंने बताया कि क्लब में फिलहाल 1200 सदस्य हैं, जिन्हें हम बेहतर जीवन जीने की ट्रेनिंग देते हैं, साथ ही लोगों से धूम्रपान न करने की अपील करते हैं।
ये सदस्य रोजाना 10 लोगों से करेंगे अपील-
पिछले दिनों मालवीय नगर के गीता भवन मंदिर में लैरिंगटॉमी क्लब ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में देशभर से क्लब के सदस्यों ने शिरकत की। इस मौके पर डॉ.एब्रॉल ने प्रत्येक सदस्य को रोजाना कम से कम 10 लोगों को धूम्रपान का सेवन न करने के लिए जागरूक करने की शपथ दिलाई। यदि प्रत्येक सदस्य रोजाना 10 व्यक्ति को धूम्रपान निषेध के लिए जागरूक करता है तो एक सदस्य एक साल में लगभग 3650 लोगों को जागरूक करेगा। इसके अलावा कार्यक्रम में बीमारी से पीड़ित मरीजों को अॉपरेशन के बाद फिर से बोलने की ट्रेनिंग के बारे में भी आवश्यक जानकारी दी गई।
फूड पाइप के जरिए बोलते हैं सदस्य-
वोकल कार्ड कैंसर से पीड़ित व्यक्ति की सर्जरी के दौरान गले से वोकल कार्ड (वाणी यंत्र) निकाल दिया जाता है, जिसकी वजह से व्यक्ति बोल नहीं पाता है। ऐसे में सर्जरी के बाद व्यक्ति को फूड पाइप के जरिए बोलने की ट्रेनिंग दी जाती है। तत्पश्चात प्रेमानंद जापान जाकर बोलने की ट्रेनिंग लेकर आए और अब यह क्लब देश के विभिन्न हिस्सों में इस बीमारी से पीड़ित लोगों की सर्जरी के बाद बोलने और बेहतर जीवन जीने के प्रति प्रशिक्षण देते हैं। इस तकनीकी के तहत व्यक्ति को खाने की पाइप के जरिए आवाज निकालने की ट्रेनिंग दी जाती है।
गुजरात के राजकोट से आए भूपेंद्र अभानी कहते हैं कि पहले वह सिगरेट बहुत पीते थें। वर्ष 2002 में वह उन्होंने अपने वोकल कार्ड की सर्जरी कराई, इसके बाद उन्हें आवाज वापस आने में एक साल लग गए, क्योंकि आसपास स्पीच थिरेपी के लिए कोई प्रशिक्षण केंद्र नहीं था। फिलहाल राजकोट स्थित नातालाल पारिख कैंसर अस्पताल में ट्रेनिंग देते हैं और कारोबार भी करते हैं।

Tuesday, November 22, 2016

जीवों से प्यार की अनूठी मिसाल- बलजीत ने गाय को बेटी की तरह पाला, मां की तरह सेवा की और मरने पर 41 गांवों के लोगों को भोज कराया, 1.20 लाख रुपए की लागत से बनवाई मूर्ति

बलिराम सिंह, नई दिल्ली
जीवों से प्रेम की अनूठी मिसाल हैं बलजीत। बलजीत ने 31 साल गाय की सेवा की और उसकी मृत्यु पर 41 गांवों के लोगों को भोज कराया। साथ ही भोज से पहले गांव में कलश यात्रा भी निकाली गई और सत्संग हुआ। इसके अलावा बलजीत ने गाय के लिए जयपुर से 1.20 लाख रुपए की लागत से गाय की प्रतिमा बनवाकर उसे गांव के मंदिर में स्थापित किया गया। रेवाड़ी के धामलावास निवासी बलजीत ने 31 साल पहले वर्ष 1985 में तीन साल की बछिया को खरीदकर  लाया था और उसे बेटी की तरह पाला। बड़ी हुई तो उसकी सेवा मां की तरह की।
हरियाणा के पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर सिंह भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए और इसे मानवता और इंसानियत की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि इससे सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए। बलजीत ने गाय को बेटी की तरह पाला और बड़ी हुई तो मां की तरह सेवा की। बलजीत ने बताया कि गाय ने सदैव दूध के माध्यम से मुखिया की तरह हमारे परिवार का लालन पोषण करती रही। 31 साल की पूरी उम्र होने पर वह दुनिया से विदा हो गईं। वह चार बछिया छोड़कर गई है। उससे हमारा रिश्ता गाय नहीं, मां की तरह था। इसलिए उसके सम्मान में सोमवार को 41 गांवों के ग्रामीण भंडारे में पहुंचे। इससे पहले गांव में कलश यात्रा निकाली गई और सत्संग का आयोजन हुआ। एक लाख 20 हजार रुपए की गाय की प्रतिमा भी मंदिर में स्थापित की गई, जिसका अनावरण राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर सिंह ने किया।

Thursday, November 17, 2016

#ITPO विश्व व्यापार मेला में कैशलेस लेनदेन का हुआ इंतजाम


बलिराम सिंह, नई दिल्ली                    
भारतीय विश्व व्यापार मेला में कैशलेस लेनदेन का इंतजाम किया गया है। भारत व्यापार प्रोत्साहन संस्थान (आईटीपीओ) ने दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (14 नवंबर से 27 नवंबर तक) हिस्सा लेने वालों को कैशलेस लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए हैं। मेला में आने वाले प्रदर्शकों और आगंतुकों को अपनी सेवा देने की अनुमति दी गई है।
भारत सरकार ने इस बाबत निम्न उपाय किए हैं-
एटीएम मशीनों की संख्या 2 से बढ़ाकर 14 कर दी गई है। (मोबाइल एटीएम समेत)
आगंतुकों और प्रदर्शकों को डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदने में कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक से पर्याप्त मात्रा में स्वाइप मशीन उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की गई है।
मेले में ही कारीगरों का खुलेगा अकाउंट-
सभी छोटे कारीगरों और प्रदर्शकों का बैंक खाता खाेलने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से साझेदारी की गई है, यदि जरूरत पड़ी तो मेला स्थल पर ही उनका अकाउंट खोला जाएगा, जिससे कि स्वाइप मशीन के जरिए उनका अकाउंट खोला जाएगा, जिससे कि वो स्वाइप मशीन के जरिए लेनदेन कर सकें।
टिकट काउंटर यानि गेट नंबर 1 और 2 पर प्रवेश टिकट देने के लिए भी स्वाइप मशीन की व्यवस्था की गई है।
पेटीएम की व्यवस्था-
पेटीएम और फ्रीचार्ज भी विश्व व्यापार मेला में डिजिटल वालेट के जरिए कैशलेस लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहे हैं।

Monday, November 14, 2016

Buddha प्राचीन भारत को समझने के लिए एक बार मथुरा संग्रहालय जरूर आएं


बलिराम सिंह, नई दिल्ली
यदि आप इतिहास में रूचि रखते हैं और प्राचीन भारतीय इतिहास के बारे में जानने के इच्छुक हैं तो एक बार मथुरा स्थित राजकीय संग्रहालय जरूर आए। शहर के बीचों बीच स्थित इस संग्रहालय में प्राचीन भारत के पुराने अवशेष और मूर्तियां रखी हैं। यहां ईसवी पूर्व बुद्धकाल से लेकर 10वीं शताब्दी तक की प्रचुर मात्रा में मूर्तियां संरक्षित हैं। यह संग्रहालय बादामी पत्थर से बना है। मथुरा और इसके आस पास की गई खुदाई से मिले अवशेष यहाँ पर रखे गए हैं। यह संग्रहालय कई साहित्यकारों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है जो यहाँ आकर प्राचीन भारत के धर्म को समझते हैं। यहाँ पर रखी मूर्तियाँ भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाती है। यहीं पर सम्राट कनिष्क की सिर विहीन मूर्ति भी संरक्षित है। यह मूर्ति संग्रहालय में प्रवेश द्वार के पास है।