Tuesday, July 15, 2014

बौद्ध भिक्षुओं ने धूमधाम से मनाया आषाढ़ पूर्णिमा


कुशीनगर-

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध बिहारों में पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर उपासक, उपासिकाओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक दान दिया।
बता दें कि बौद्ध अनुयायियों के लिए आषाढ़ी पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व है। बौद्ध अनुयायियों के मुताबिक आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध अपनी मां के गर्भ में आये थे। बुद्ध ने इसी दिन राज दरबार का परित्याग किया था तथा ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में प्रथम धम्मोपदेश दिया था। आषाढ़ी पूर्णिमा से ही तीन माह तक चलने वाले वर्षावास का प्रारम्भ होता है जिसकी परम्परा भगवान बुद्ध ने राजगीरी में प्रारम्भ किया था। इसी वजह से आज के दिन बौद्ध धर्मावलंबी विभिन्न प्रकार के समारोहों का आयोजन करते हैं।
कुशीनगर में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय बौद्ध भिक्षुओं के अतिरिक्त थाईलैंड से आये भिक्षुओं को दान दिया गया।

Thursday, July 10, 2014

चीनी पर्यटक दल ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा का दर्शन किया


कुशीनगर

चीन के एक पर्यटक दल ने सोमवार को कुशीनगर स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा का दर्शन किया। पर्यटकों ने विभिन्न बौद्ध विहारों और स्तूपों का भी दर्शन किया।
पहली बार आए चीनी यात्री कुशीनगर में काफी खुश नजर आये। पर्यटकों ने कहा कि कुशीनगर के बारे में जैसा सुना था वैसा ही यहां पर शांति और प्राकृतिक छटा देखने को मिली। यहां की मिट्टी में आध्यात्मिक ऊर्जा का असीम भंडार है।
 चीनी पर्यटकों के 32 सदस्यीय दल में तिब्बती महायान संप्रदाय के एक भिक्षु व एक भिक्षुणी भी शामिल थे। उन्होंने सबसे पहले मुकुट बंधन चैत्य पहुंचे और यहां पर पूजा अर्चना किया। इसके बाद दल ने महापरिनिर्वाण बुद्ध विहार का दर्शन कर यहां बुद्ध की निर्वाण मुद्रा वाली ऐतिहासिक प्रतिमा के समक्ष भारत-चीन संबंधों की प्रगाढ़ता हेतु मंगल कामना की।