कुशीनगर-
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध बिहारों में पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर उपासक, उपासिकाओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक दान दिया।
बता दें कि बौद्ध अनुयायियों के लिए आषाढ़ी पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व है। बौद्ध अनुयायियों के मुताबिक आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध अपनी मां के गर्भ में आये थे। बुद्ध ने इसी दिन राज दरबार का परित्याग किया था तथा ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में प्रथम धम्मोपदेश दिया था। आषाढ़ी पूर्णिमा से ही तीन माह तक चलने वाले वर्षावास का प्रारम्भ होता है जिसकी परम्परा भगवान बुद्ध ने राजगीरी में प्रारम्भ किया था। इसी वजह से आज के दिन बौद्ध धर्मावलंबी विभिन्न प्रकार के समारोहों का आयोजन करते हैं।
कुशीनगर में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय बौद्ध भिक्षुओं के अतिरिक्त थाईलैंड से आये भिक्षुओं को दान दिया गया।