Monday, September 26, 2016

दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चों के इलाज में सलमान खान सहित कई संस्थाएं कर रही हैं आर्थिक मदद



बलिराम सिंह, नई दिल्ली
दुनिया में दिल के रोगों की राजधानी की ओर भारत तेजी से बढ़ रहा है।  बदलती जीवनशैली की अनियमितताएं और तनाव से 30 साल की उम्र तक के लोगों में दिल की बीमारी आम हो रही है। लेकिन छोटे बच्चों में भी दिल के रोगों के बढ़ते मामले चिंतनीय है। लेकिन खास बात यह है कि इस बीमारी के इलाज के लिए फिल्म अभिनेता सलमान खान से लेकर देश की कई संस्थाएं भी अार्थिक सहयोग कर रही हैं, ताकि कोई भी दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चा इलाज से वंचित न रह जाए।
जन्मजात भी हो सकती है दिल की बीमारी-
बच्चों में दिल के रोग जन्मजात भी हो सकते हैं और बाद में भी हो सकते हैं। देश मे 1 प्रतिशत बच्चे जन्मजात दिल की बीमारी से पीड़ित होते हैं जिन्हें ब्लू बेबीज़ कहा जाता है। वर्तमान में इसका इलाज संभव है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के नवनिर्वाचित नेशनल प्रेसीडेंट और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (HCFI) के प्रेसीडेंट डाॅ केके अग्रवाल ने बताया रियोमेटिक हार्ट डिजीज आम तौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों में पाई जाती है और गले के स्टरेप संक्रमण से होती है। इसलिए पेरेंट्स को बच्चों में कभी खांसी को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए या छींके को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वैसे गला ख़राब होने, जोड़ों में सूजन और बुख़ार बच्चों में ठीक हो सकते हैं, लेकिन दिल के वाॅल्व का स्थाई तौर पर क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। पीड़ित बच्चे का वाल्व बदलना पड़ता है, यदि सही समय पर ना किया जाए तो जान भी जा सकती है। डॉ.केके अग्रवाल का कहना है कि पैसे की कमी की वजह से देश में किसी भी दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चे की मौत न हो। संविधान की धारा 21 के तहत नागरिक अपने प्रदेश सरकार से मुफ्त सर्जरी की सुविधा प्राप्त करने के लिए हाई कोर्ट जा सकता है।
निजी संस्थानों में भी होती है मदद-
ऐसे बच्चों को निजी संस्थानों में भी मदद होती है। समीर मलिक हार्ट केयर फाउंडेशन फंड की पहल है जो ज़रूरतमंद बच्चों को दिल के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इसके हेल्पलाईन नम्बर 9958771177 पर सोमवार से शनिवार फोन करके कोई भी इस मदद के लिए आवेदन कर सकता है।
रोटरी क्लब-
देश के कई हिस्सों में रोटरी क्लब बच्चों के दिल के रोगों का मुफ्त इलाज करवाते हैं।
सलमान खान की संस्था करवाती है इलाज-
फिल्म अभिनेता सलमान खान की संस्था बीइंग ह्यूमन जन्मजात दिल के रोगों से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता करती है। 
राज्य करते हैं एक लाख रुपए की मदद-
लगभग सभी प्रदेश गरीबी रेखा या इसके सामान कार्ड धारकों को जन्मजात दिल के रोगों के लिए एक लाख रुपए तक की सहायता प्रदान करते हैं।
दिल्ली सरकार भी करती है मदद-
दिल्ली प्रदेश सरकार भी उन बच्चों को आर्थिक सहायता देती है जिनके पेरेंट्स की आमदन तीन लाख सालाना से कम है।
प्रधानमंत्री राहत कोष से भी मिल सकती है मदद-
माता-पिता कानूनी सलाहकार की मदद से नगर निगम में इस मदद के लिए आवेदन कर सकते है, और विधायक या सांसद के ज़रिए प्रधान मंत्री राहत फंड से भी मदद ले सकते हैं।
पूत्तापारथी हार्ट सेंटर में होती है मुफ्त सर्जरी-
बेंगलूर स्थित पूत्तापारथी हार्ट सेंटर भी ऐसे बच्चों की मुफत सर्जरी करता है।
महेश्वरी क्लब भी करता है मदद-
महेश्वरी क्लब, महेश्वरी परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा देता है,  ऐसी और भी कई संस्थाएं हैं जो सेवा प्रदान करती हैं।
धार्मिक संस्थाओं से भी करें अपील-
लोग अपने धार्मिक संस्थाओं गुरूद्वारों, मस्जिदों और हिंदू महासभा से भी मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं।
जीबी पंत में भी होती है मुफ्त सर्जरी-
दिल्ली सरकार के सरकारी हस्पताल भी कई तरह की मुफ्त सर्जरियां होती हैं, जैसे दिल्ली का जीबी पंत अस्पताल, यहां की दिल की सर्जरी मुफ्त करता है।
सफदरजंग अस्पताल-
दिल्ली स्थित इस केंद्रीय अस्पताल में दिल के रोगों के पूरे देश के मरीज़ों की मुफ्त सर्जरी होती है।
सीएसआर पॉलिसी के तहत भी मांग सकते हैं सहायता-
सीएसआर के तहत कॉरपोरेट सेक्टर अथवा पीएसयूज (पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग) से भी इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगी जा सकती है।

Sunday, September 25, 2016

राज्यारोहण के 20वें साल सम्राट अशोक ने की थी लुंबिनी ग्राम की यात्रा, 87.5 फीसदी कर दिया था लगान माफ

राज्यारोहण के 20वंे साल सम्राट अशोक ने की थी लुंबिनी की यात्रा
बलिराम सिंह, नई दिल्ली             
Emperor Ashoka visited the birth place of Lord Buddha. He also granted Lumbini a tax free status.
एक बार सम्राट अशोक के मन में भगवान बुद्ध के जन्मस्थान को देखने की प्रबल इच्छा हुई। सम्राट अशोक ने अपने गुरू मोगलीपुत्र तिस्स के साथ भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी देखने गए। इतिहासकारों के मुताबिक सम्राट अशोक ने भगवान बुद्ध के जन्म से 318 वर्ष बाद और अपने राज्याभिषेक के 20वें साल में लुंबिनी की यात्रा की और यहां पर एक पाषाण स्तंभ लगवाया। सम्राट अशोक ने इस यात्रा के दौरान ही लुंबिनी ग्राम से लगान में 87.5 फीसदी माफ कर िदया, अर्थात कुल उत्पादन का लगान के तौर पर 1/8 वां हिस्सा ही देने का आदेश दिया और शेष कर माफ कर दिया।
अशोक ने भगवान बुद्ध के जन्मस्थल के चारों ओर पत्थर की दीवार बनवाई, और स्मारक के रूप में एक स्तंभ का निर्माण करवाया।
स्तंभ पर लिखा गया ’इध बुधे जाते’-
स्तम्भ पर ’इध बुधे जाते’ अर्थात यहां बुद्ध का जन्म हुआ था, अंकित किया, जो आज भी नेपाल में भगवान बुद्ध के जन्मस्थान को सुनिश्चित कर रहा है। भगवान बुद्ध के प्रति अपनी असीम श्रद्धा के कारण सम्राट अशोक ने पवित्र लुंबिनी अंचल (क्षेत्र) को दान कर दिया। जिस पुष्करणी (जल कुंड) से महामाया (भगवान बुद्ध की मां) ने पानी पीया था, वह आज भी विद्धमान है। पुष्करणी की दूसरी तरफ एक ऊंचा टीला है, जिसपर ईंटों का विशाल स्तंभ देखने को मिलता है। जो सिद्धार्थ के जन्मस्थान होने का संकेत कर रहा है।
लुंबिनी में दो अधुनिक विहार-
लुंबिनी में दो आधुनिक विहार है। पहला थेरवादी बुद्ध विहार, जिसका निर्माण वर्ष 1956 में कुशीनगर के भिक्षु चंद्रमणि महाथेरा द्वारा निर्मित कराया गया और दूसरा तिब्बतियों द्वारा बनाया गया बुद्ध विहार है।
कलिंग युद्ध के बाद बौद्ध धर्म का अनुयायी हो गया अशोक-
कलिंग युद्ध में लाखों लोगों के मरने के बाद सम्राट अशोक का मन विचलित हो गया और बौद्ध धर्म का अनुयायी हो गया। बौद्ध धर्म अपनाने के बाद सम्राट अशोक ने लुंबिनी ग्राम का दर्शन करने आया। इसके अलावा सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा।

Wednesday, September 21, 2016

#IndianRalway रेलवे स्टेशनों पर बुजुर्गों-दिव्यांग यात्रियों का सहयोग करेंगे ’यात्री मित्र’




बलिराम सिंह, नई दिल्ली
रेलवे स्टेशनों पर बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को मदद उपलब्ध कराने के लिए रेल मंत्रालय ने व्हीलचेयर एवं कुली सेवाएं बुक करने के लिए यात्री मित्र सेवा शुरू करने का फैसला किया है।
योजना के तहत यात्री मित्र या तो कोई सहायक हो सकता है या आईआरसीटीसी द्वारा उपलब्ध कराया गया कोई अन्य व्यक्ति या आईआरसीटीसी द्वारा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त सेवा प्रदाता हो सकता है।
प्रदान की जाने वाली सेवाएं-
यात्री मित्र दिव्यांग, बीमार और वृद्ध व्यक्तियों को व्हील चेयर एवं कुली सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
आईआरसीटीसी उपलब्ध कराएगी यात्री मित्र सेवा-
यात्री मित्र सेवा उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी आईआरसीटीसी की होगी। आईआरसीटीसी किसी गैर सरकारी संगठन, चैरिटेबल ट्रस्ट, सीएसआर के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आदि के माध्यम से नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
ऐसे करें यात्री मित्र की बुकिंग-
आईआरसीटीसी की ई-टिकटिंग वेबसाइट पर या मोबाइल के माध्यम से 139 (आईवीआरएस और एसएमएस) के जरिए बुकिंग की जा सकती है। जल्द ही सीआरआईएस (क्रिस) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन विकसित और जारी किए जाने पर यात्री मित्र की बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
जिस स्टेशन पर यात्री द्वारा यह सुविधा बुक की जाएगी, वहां पर बुकिंग विवरण (ट्रेन का नाम और नंबर, आगमन और प्रस्थान की तारीख और समय, पीएनआर नंबर, यात्री का नाम, कोच और बर्थ संख्या) एसएमएस द्वारा यात्री और सेवा प्रदाता आईआरसीटीसी को भेजी जाएगी। इसके अलावा यात्री मित्र का मोबाइल नंबर भी यात्री के आगमन के अनुमानित समय से पहले एसएमएस के माध्यम से यात्री को भेजा जाएगा, ताकि यात्री मित्र से संपर्क कर सके।

Thursday, September 15, 2016

Dengue - chikungunya डेंगू-चिकनगुनिया से पर्यटक उद्योग को लग सकता है झटका, -अमेरिकी दूतावास ने जारी की हैल्थ एडवाइजरी


गोल्डन ट्राईएंगल सर्किट में आते हैं 35 फीसदी विदेशी पर्यटक
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
यदि डेंगू-चिकनगुनिया पर जल्द ब्रेक नहीं लगाया गया तो देश के पर्यटन उद्योग और हवाई यात्रा उद्योग को गहरा झटका लग सकता है।  देश की उद्योग जगत की प्रमुख संस्था एसोचैम ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को आगाह किया है कि यदि राजधानी में चिकनगुनिया और डेंगू पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो पर्यटन उद्योग और एविएशन (हवाई यात्रा) उद्योग को गहरा झटका लग सकता है और अरबों रूपए का नुकसान हो सकता है। डेंगू-चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी पर्यटकों के लिए एक हैल्थ एडवाइजरी भी जारी किया है।
एसोचैम के मुताबिक भारत में आने वाले 35 फीसदी विदेशी यात्री दिल्ली में आते हैं, अथवा दिल्ली से होते हुए पड़ोसी राज्यों के पर्यटक स्थलों पर घूमने जाते हैं। चूंकि विदेशी पर्यटकों को दिल्ली आकर्षित करती है। इसलिए देश के एक तिहाई पर्यटक दिल्ली में आते हैं अथवा यहां से गुजरते हैं। उद्योग जगत को चिंता है कि अक्टूबर से भारत में पर्यटन का पीक सीजन शुरू हो जाता है। डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बढ़ती बीमारियों की वजह से दिल्ली में पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ रही है, जिसका प्रतिकूल असर पश्चिमी भारत के जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, बिकानेर, जैसलमेर और अन्य पर्यटन स्थलों पर पड़ रहा है। सर्दियों के मौसम में गोल्डन ट्राईएंगल सर्किट (दिल्ली-आगरा-जयपुर) ढाई से तीन लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत कहते हैं कि लगभग 30 फीसदी पर्यटक प्रति महीने दिल्ली के जरिए गोल्डन ट्राएंगल क्षेत्र में आते हैं।
होटल उद्योग को भी झटका-
राजधानी में बढ़ते डेंगू-चिकनगुनिया का पर्यटकों पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसकी वजह से होटल्स, एयरलाइंस, टैक्सी ऑपरेर्ट्स, रेस्टोरेंट इत्यादि कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे में कई टूर ऑपरेटर अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन के मद्देनजर आवश्यक सावधानियां बरतने लगे हैं।
अमेरिकी दूतावास ने जारी की एडवाइजरी-
भारत में आने वाले अमेरिकी पर्यटकों के लिए अमेरिकी दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर हैल्थ एडवाइजरी जारी करके बताया है कि भारत के कुछ हिस्सों में मच्छर जनित बीमारियां डेंगू और चिकनगुनिया की स्थिति विस्फोटक हो गई है। इसी तरह की एडवाइजरी पूर्व में यूके दूतावास भी जारी कर चुका है।
दो बिलियन डॉलर की होती है कमाई-
सर्दियों के मौसम में एक महीने के अंदर लगभग दो बिलियन (2 अरब) अमेरिकी डॉलर की कमाई पर्यटन उद्योग से होती है।
जुलाई 2016 में आने वाले विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा-
जुलाई 2015 में भातर में आने वाले टॉप 15 देशों में सर्वाधिक (17.30 फीसदी) पर्यटक बंग्लादेश से आए। इसके अलावा अमेरिका से 16.51 फीसदी, मलेशिया से 3.49 फीसदी, फ्रांस से 3.12 फीसदी, श्रीलंका से 2.94 फीसदी, कनाडा से 2.66 फीसदी, चीन से 2.32 फीसदी, जर्मनी से 2.31 फीसदी, जापान से 2.20 फीसदी, आस्ट्रेलिया से 2.20 फीसदी, नेपाल से 2.04 फीसदी, ओमान से 2.04 फीसदी, यूएई से 1.99 फीसदी और पाकिस्तान से 1.66 फीसदी पर्यटक भारत आए।
सार्वधिक विदेशी पर्यटक आने वाले भारत के टॉप 15 पोर्ट्स-
जुलाई महीने में सर्वाधिक 26.22 फीसदी विदेशी पर्यटक दिल्ली हवाई अड्‌डे पर आए। इसके अलावा 17.04 फीसदी मुंबई एयरपोर्ट, 10.11 फीसदी चेन्नई एयरपोर्ट, 9.82 फीसदी हरिदासपुर लैंड चेक पोस्ट, 7.31 फीसदी बंगलूरु एयरपोर्ट, 5.14 फीसदी कोचिन एयरपोर्ट, 5.04 फीसदी हैदराबाद एयरपोर्ट, 4.02 फीसदी कोलकात्ता एयरपोर्ट, 1.97 फीसदी गेडे रेल, 1.91 फीसदी अहमदाबाद एयरपोर्ट, 1.91 त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट, 1.55 फीसदी त्रिचुलापल्ली एयरपोर्ट, 1.09 फीसदी अटारी-बाघा लैंड चेक पोस्ट, 0.97 फीसदी अमृतसर एयरपोर्ट अौर 0.71 फीसदी पर्यटक घोजादंगा लैंड चेक पोस्ट के जरिए आए। भारत ने वर्ष 2020 तक दुनिया के एक फीसदी पर्यटक और वर्ष 2025 तक दो फीसदी पर्यटकों को भारत में आकर्षित करने का लक्ष्य है।