Wednesday, September 24, 2014

दुनिया के 7 मशहूर विश्वविद्यालयों में सर्वाधिक प्राचीन नालंदा


दुनिया के प्राचीन विश्वविद्यालय-

1-प्राचीन नालंदा की स्थापना- 500 ई. के आसपास
2-ऑक्सफोर्ड - 1096 ई.
3-कैंब्रिज   - 1209 ई.
4-पेरिस यूनिवर्सिटी- 1096 ई.
5-अल-कराउइन (मोरक्को)- 859 ई.
6-अल अजहर (मिस्र) - 972 ई.
7-बोलोना यूनिवर्सिटी (इटली)- 1088 ई.
प्राचीन नालंदा, एक नजर-
प्राचीन नालंदा की स्थापना- 500 ई. के आसपास राजा सकरादित्य द्वारा
प्राचीन नालंदा में आने वाले छात्र-शिक्षक- चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया, तिब्बत, श्रीलंका, यूनान, फारस
उत्कर्ष के समय नालंदा में छात्रों की संख्या-10 हजार, शिक्षक-2 हजार
नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया-1193 ई. में बख्तियार खिलजी ने
नया नालंदा विश्वविद्यालय एक नजर-   
28 मार्च 2006 को बिहार विधानसभा को संबोधित करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने प्राचीन नालंदा महाविहार की पुनस्र्थापना का आह्वान किया। तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा महाविहार के प्राचीन खंडहरों से 12 किमी दूर राजगीर में 433 एकड़ भूमि इसके लिए आवंटित कर दी थी।
16 देश कर रहे हैं सहयोग, कुलाधिपति-नोबल पुरस्कार विजेता-अमत्र्य सेन, कुलपति-प्रो. गोपा सब्बरवाल, 15 छात्रों के साथ नए विश्वविद्यालय का प्रथम सत्र 1 सितंबर 2014 से शुरू, प्रति छात्र वार्षिक फीस-एक लाख 60 हजार रुपए

Saturday, September 20, 2014

नालंदा के बाद अब विक्रमशीला विश्वविद्यालय को किया जाएगा पुनर्जीवित


-विक्रमशीला को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कर दिया था नष्ट
-नालंदा विश्वविद्यालय में शुरू हुई विधिवत पढ़ाई
बलिराम सिंह, नई दिल्ली

नालंदा विश्वविद्यालय के बाद अब विक्रमशीला विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया जाएगा। शुक्रवार को नालंदा विश्वद्यिालय में विधिवत पढ़ाई शुरू होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने यह घोषणा की। बता दें कि प्राचीन काल में नालंदा की तरह विक्रमशीला�भी एक महत्वपूर्ण शिक्षा का केन्द्र था, जिसे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि यह एक नए युग की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्जीवन नहीं है, बल्कि किसी वजह से बीच में विलुप्त हुई परंपरा की फिर से शुरूआत है। उन्होंने कहा कि नालंदा एक परंपरा का नाम है और परंपराएं मरती नहीं हैं। बता दें कि विश्वविद्यालय के पुनर्जीवन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे कलाम के साथ-साथ बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का अहम योगदान है।
विश्वविद्यालय के विकास के लिए अगले 10 वर्षों में केन्द्र सरकार नालंदा विश्वविद्यालय को 2727 करोड़ रुपए देगी।

Saturday, September 13, 2014

वियतनाम को दिया जाएगा महाबोधि का नवजात पौधा


नई दिल्ली

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपनी वियतनाम यात्रा के दौरान बिहार के बोधगया स्थित पवित्र बोधिवृक्ष का एक नवजात पौधा वियतनाम के राष्ट्रपति को उपहार स्वरूप भेंट करेंगे। इस पवित्र पौधे को गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद दिल्ली भेज दिया गया है। बोधगया मंदिर प्र्रबंधन समिति के सचिव एन दोरजी के मुताबिक महाबोधि मंदिर में विशेष पूजा अर्चना और पवित्र महाबोधि वृक्ष की दीर्घायु जीवन की कामना के बाद विशेष दूत के माध्यम से बोधिवृक्ष के नवजात पौधे को दिल्ली भेजा गया है।

Sunday, September 7, 2014

गंगा की लहरों पर ले समुंद्र का मजा, शुरू हुई क्रूज सेवा


-शानो-शौकत से भरपूर क्रूज एमवी पटना से वाराणसी के लिए रवाना
वाराणसी-
समुंद्र की लहरों पर क्रूज का मजा अब आप गंगा की लहरों पर भी ले सकते हैं। पटना से वाराणसी तक गंगा पर क्रूज सेवा शुरू हो गई है। शनिवार को शानो-शौकत से भरपूर क्रूज एमवी पटना के गायघाट से वाराणसी के लिए रवाना हुआ। छह दिनों की इस यात्रा में क्रूज लगभग आधा दर्जन शहरों से गुजरेगा। क्रूज की पहली यात्रा में जापान के 25 पयर्टक शामिल हैं। क्रूज की वापसी 13 सितंबर को वाराणसी से पटना के लिए होगी।
असम-बंगाल नेवीगेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरू की इस टूर सर्विस में प्रति यात्री 11500 रुपए का भुगतान करना होगा। यात्रा के लिए कंपनी की वेबसाइट पर बुकिंग की जा सकती है। यह सेवा महीने में 4 बार मुहैया करायी जाएगी। इसके अलावा अक्टूबर से फरवरी तक पटना से कोलकाता के बीच महीने में दो बार और मार्च से मई तक कोलकाता से फरक्का के बीच चलाया जाएगा।
क्रूज की खाशियत-
एयरकंडिशनर कमरे-22 (डबल बेड-18 और सिंगल बेड-4)
पर्यटकों के रहने की व्यवस्था-40
सुविधाएं- क्रूज में कैंटीन, लॉन, कॉमन रूम, लॉबी, ई-लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी, मेस, सन बाथ, कैफेटेरिया इत्यादि
क्रूज का स्टाफ-क्रूज पर दो कैप्टन समेत 26 सदस्यीय स्टाफ है।
इन शहरों से गुजरेगा क्रूज-मनेर, बक्सर, गाजीपुर, सारनाथ, रायनगर व चुनार

Monday, September 1, 2014

821 साल बाद फिर शुरू हुआ नालंदा विश्वविद्यालय


नालंदा-

देश के सर्वाधिक प्राचीन और अपने जमाने में दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय नालंदा विश्वविद्यालय में 821 साल बाद सोमवार से दोबारा पढ़ाई शुरू हुई। नए विश्वविद्यालय का निर्माण प्राचीन विश्वविद्यालय के स्थान से 12 किलोमीटर दूर राजगीर में किया गया है।
विश्वविद्यालय में शिक्षा की शुरूआत 8 विद्यार्थियों के साथ की गई, जिनकी कक्षाएं राज्य सरकार के कला संस्कृति व पर्यटन विभाग के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गईं। पहले दिन इंट्रोडक्शन सेशन चला। कन्वेंशन सेंटर को 15 दिन के लिए किराए पर लिया गया है। 14 सितंबर को विश्वविद्यालय के औपचारिक उद्घाटन के बाद कक्षाएं प्रशासनिक भवन में लगेंगी।
रिसर्च पर जोर-

विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. गोपा सबरवाल ने बताया कि यहां कुल 7 विषय पढ़ाए जाएंगे। जापान और भूटान के एक-एक छात्र समेत कुल 15 छात्रों ने एडमिशन लिया है। 8 शिक्षक भी आ चुके हैं। उन्होंने आशा प्रकट की कि यहां विदेशों से और भी छात्र पहुंचेंगे। यहां पढ़ाई के अलावा रिसर्च पर विशेष जोर दिया जाएगा। 
2021 तक पूरा होगा स्थायी भवन का निर्माण-

विश्वविद्यालय की डीन डॉ. अंजना शर्मा ने बताया कि कक्षाओं और दफ्तर के लिए अस्थायी परिसर बन चुका है। करीब 242 एकड़ में स्थायी भवन का काम चल रहा है, जो 2021 तक पूरा होगा।
शिक्षा का केन्द्र नालंदा-
बता दें कि इस विश्वविद्यालय में 413 से 1193 ईसवी तक यानी 780 साल तक यहां पढ़ाई हुई। यहां पर बौद्ध धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, वास्तु, धातु और अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा दी जाती थी। नये विश्वविद्यालय में बिजनेस मैनेजमेंट, इकोलॉजी, पर्यावरण विज्ञान, इतिहास, इंटरनेशनल रिलेशंस एंड पीस इत्यादि भी पढ़ाए जाएंगे।