नालंदा-
देश के सर्वाधिक प्राचीन और अपने जमाने में दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय नालंदा विश्वविद्यालय में 821 साल बाद सोमवार से दोबारा पढ़ाई शुरू हुई। नए विश्वविद्यालय का निर्माण प्राचीन विश्वविद्यालय के स्थान से 12 किलोमीटर दूर राजगीर में किया गया है।
विश्वविद्यालय में शिक्षा की शुरूआत 8 विद्यार्थियों के साथ की गई, जिनकी कक्षाएं राज्य सरकार के कला संस्कृति व पर्यटन विभाग के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गईं। पहले दिन इंट्रोडक्शन सेशन चला। कन्वेंशन सेंटर को 15 दिन के लिए किराए पर लिया गया है। 14 सितंबर को विश्वविद्यालय के औपचारिक उद्घाटन के बाद कक्षाएं प्रशासनिक भवन में लगेंगी।
रिसर्च पर जोर-
विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. गोपा सबरवाल ने बताया कि यहां कुल 7 विषय पढ़ाए जाएंगे। जापान और भूटान के एक-एक छात्र समेत कुल 15 छात्रों ने एडमिशन लिया है। 8 शिक्षक भी आ चुके हैं। उन्होंने आशा प्रकट की कि यहां विदेशों से और भी छात्र पहुंचेंगे। यहां पढ़ाई के अलावा रिसर्च पर विशेष जोर दिया जाएगा।
2021 तक पूरा होगा स्थायी भवन का निर्माण-
विश्वविद्यालय की डीन डॉ. अंजना शर्मा ने बताया कि कक्षाओं और दफ्तर के लिए अस्थायी परिसर बन चुका है। करीब 242 एकड़ में स्थायी भवन का काम चल रहा है, जो 2021 तक पूरा होगा।
शिक्षा का केन्द्र नालंदा-
बता दें कि इस विश्वविद्यालय में 413 से 1193 ईसवी तक यानी 780 साल तक यहां पढ़ाई हुई। यहां पर बौद्ध धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, वास्तु, धातु और अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा दी जाती थी। नये विश्वविद्यालय में बिजनेस मैनेजमेंट, इकोलॉजी, पर्यावरण विज्ञान, इतिहास, इंटरनेशनल रिलेशंस एंड पीस इत्यादि भी पढ़ाए जाएंगे।
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