Sunday, August 28, 2016

#Bihar सांसद पप्पू यादव का निवास बना बिहार के मरीजों का ‘सेवाश्रम’, ठहरे हैं 3 सौ मरीज व उनके परिजन, रोजाना बनते हैं 50 नए ओपीडी कार्ड


एक अपील- देश के बड़े शहरों में खुले बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए आप भी अपने सांसद पर दबाव डालें, ताकि आपकी समस्या काफी हद तक दूर हो सके 

-मरीजों के रहने, खाने-पीने व छोटे-मोटे खर्च का भी होता है इंतजाम
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
जैसे ही आप बिहार के सांसद पप्पू यादव का नाम सुनते हैं, आपके मन में एक बाहुबली सांसद की छवि कौंधती है, लेकिन इस रॉबिनहुड स्टाईल वाले सांसद का एक रूप यह भी है। इसके लिए आपको इस सांसद के निवास पर आना होगा, जहां पर 300 मरीज और उनके परिजन ठहरे हुए हैं। अनेक नकारात्मक खबरों के बावजूद जनता इस सांसद को भारी वोटों से जीताकर भारत के लोकतंत्र के मंदिर ‘संसद’ में बार-बार भेज रही है।
बिहार से बाहर के बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि सांसद पप्पू यादव ऊर्फ राजेश रंजन अपने आवास में पिछले कई वर्षों से ‘सेवाश्रम’ चला रहे हैं। यहां पर सुपौल, पूर्णिया, मधेपुरा सहित उत्तर बिहार से काफी तादाद में मरीज और उनके परिजन ठहरे हुए हैं, जिन्हें मुफ्त में भोजन और ठहरने का इंतजाम किया जाता है। यदि ऐसे इंतजाम देश के हर सांसद करने लगें तो आर्थिक तौर से काफी कमजोर मरीजों की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। 
रोजाना बनते हैं 50 मरीजों के ओपीडी कार्ड-
सदैव सुर्खियों में रहने वाले राजेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव का मानव सेवा का एक रूप यह भी है, जो नई दिल्ली के 11-ए, बलवंत राय मेहता लेन स्थित सांसद निवास में आने पर दिखता है। सांसद पप्पू यादव कहते हैं कि हमारा स्टाफ रोजाना लगभग 50 मरीजों का ओपीडी कार्ड बनवाता है और उन्हें इलाज के लिए एम्स, सफदरजंग जैसे बड़े अस्पतालों में लेकर जाता है। इस बाबत सेवाश्रम में बकायदा 3 स्टाफ रखे गए हैं, जो केवल मरीजों के इलाज में सहयोग करते हैं। इसके अलावा दो स्टाफ पूर्णिया, दो स्टाफ मधेपुरा और 2 स्टाफ पटना में हैं, जो मरीजों को पूर्णिया, मधेपुरा से दिल्ली-पटना जाने का इंतजाम करते हैं। सांसद पप्पू यादव कहते हैं कि केवल दिल्ली में चल रहे सेवाश्रम में मरीजों के निवास और खान-पान व छोटी-मोटी खर्च पर लगभग 12 हजार रुपए रोजाना खर्च होते हैं, इसके अलावा पटना और पूर्णियां में भी मरीजों के इलाज कार्य पर काफी खर्च होता है। यह राशि हमें लोगों के सहयोग से मिलती है। इसके अलावा हमारे घर से अनाज आ जाता है। 
 ‘सेवाश्रम’ में ठहरे कुछ मरीजों की स्थिति-
केस नंबर 1.
बिहार के मधेपुरा निवास मनोज कुमार (45) की किडनी फेल हो गई है। मनोज कुमार पिछले सात महीने से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे हैं। अब उनकी पत्नी बेबी कुमारी किडनी दान करेंगी। इलाज पर पूरा खर्च लगभग सवा सात लाख रुपए खर्च होंगे। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से मनोज कुमार को तीन लाख रुपए का अार्थिक सहयोग मिल गया है। फिलहाल मनोज कुमार मधेपुरा से सांसद व जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पप्पू यादव के निवास पर खोले गए सेवाश्रम में पिछले सात महीने से रह रहे हैं।
केस नंबर 2.
इसी तरह सुपौल जिला के चंद्रदेव कुमार जून 2015 में बाइक से फिसल गए। बिहार में डॉक्टर की गलत सर्जरी की वजह से चंद्रदेव कुमार के दोनों पांव काम करना बंद कर दिए। फिलहाल चंद्रदेव कुमार का इलाज एम्स में चल रहा है। चंद्रदेव कुमार भी अपने परिजनों के साथ सांसद पप्पू यादव के सेवाश्रम में निवास कर रहे हैं। 

केस नंबर 3.
सुपौल जिला के निवासी 9 वर्षीय नीतीश कुमार के परिजन भी अपने बच्चे के साथ पिछले 14 दिनों से सांसद निवास मंे ठहरे हैं। नीतीश कुमार के पांव में चोट के बाद सूजन आ गई। पूर्णिया के निजी डॉक्टर ने नीतीश को कैंसर बताया, लेकिन पटना में दिखाने पर डॉक्टरों ने जांच में कैंसर से इंकार किया। लेकिन वहां भी इलाज में देरी होने की वजह से अब दिल्ली के एम्स में नीतीश कुमार का इलाज चल रहा है। ये सुविधा केवल मनोज कुमार, चंद्रद्रेव  कुमार, नीतीश कुमार को  ही नहीं  मिल रही है, बल्कि बिहार के पूर्णिया निवासी मुंह कैंसर से पीड़ित धनीक लाल मंडल, पेट में गांठ की बीमारी से पीड़ित अमोल कामत, अररिया जिला के शाहिदा सहित लगभग 300 से ज्यादा  मरीज सांसद के ‘सेवाश्रम’ में ठहरे हुए हैं। 
 
एम्स में रोजाना आते हैं 10 हजार मरीज-
बता दें कि एम्स में रोजाना दस हजार के करीब इलाज के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के आने और निवास की कमी की वजह से रात्रि में भारी तादाद में मरीजों को एम्स के बाहर मैट्रो स्टेशन के पास पटरी पर ही रात बिताने को मजबूर होना पड़ता है। अधिकांश मरीजों और उनके परिजनों को इलाज से ज्यादा अस्पताल के बाहर रहने और खाने-पीने में ज्यादा धनराशि खर्च करना पड़ता है। ऐसे में यदि मरीजों को रहने और सस्ता भोजन मिल जाए, तो अन्य राज्यों से आने वाले मरीजों की समस्याएं काफी हद तक दूर हो जाएगी। 


यहां कर सकते हैं फोन-
1.पूर्णिया, बिहार-
रंजन निकेतन, कोर्ट स्टेशन रोड, जिला-पूर्णिया, बिहार
फोन नंबर-06454-227479, 227922
2.दिल्ली
11-ए, बलवंत राय मेहता लेन, कस्तूरबा गांधी मार्ग, नई दिल्ली

Friday, August 26, 2016

#Kalahandi केवल सरकारी सिस्टम ही नहीं, बल्कि समाजिक पतन का भी शिकार हुए दाना मांझी

बलिराम सिंह, नई दिल्ली
ओड़िशा के कालाहांडी की दर्द विदारक घटना पर तमाम मीडिया संगठन, बुद्धिजीवी वर्ग केवल सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है, लेकिन जरा सोचिए, क्या ये घटना केवल सरकारी सिस्टम के फेल होने का नतीजा है, अथवा हमारे सामाजिक पतन का परिणाम? इस तरह की घटना पूरी तरह से हमारे सामाजिक तानाबाना का फेल होना बता रहा है।
दाना मांझी अपनी पत्नी को कंधे पर रख कर अस्पताल से घर तक 12 किलोमीटर पैदल चले। उन्हें रास्ते में आते हुए तमाम कोट-पैंट धारी पढ़े हुए, अशिक्षित लोग देख रहे हैं, लेकिन किसी ने दाना मांझी के साथ कंधा शेयर नहीं किया। आखिर हमारा समाज कहां जा रहा है, हम क्यों नहीं इस तरह की समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं।
अरे जनाब, सरकारी सिस्टम को तो देश की राजधानी नई दिल्ली में ही दीमक चाट गया है। राजधानी में आए दिन होने वाली हिंसक घटनाएं, महिलाओं, बच्चों के साथ उत्पीड़न जैसी समस्याएं जगजाहीर है। दिल्ली में स्थित अस्पतालों के बाहर खड़ी एंबुलेंस बहुत कुछ कह जाती हैं।
ऐसे में हम इस समस्या के लिए केवल सिस्टम को दोष देकर अपना दामन पाक-साफ नहीं कर सकते हैं। इस मामले में हम भी पूरी तरह से दोषी हैं। हमारे समाज के लोग दाना मांझी के साथ क्यों नहीं खड़े हुए। उसे आर्थिक सहयोग अथवा उसकी पत्नी को कांधा क्यों नहीं दिया, इसके लिए पूरा समाज दोषी है। अत: हमें पूरे समाज को बदलने की जरूरत है।
घटना पर एक नजर-
ओडिशा के सर्वाधिक पिछड़े जिले कालाहांडी में एक आदिवासी दाना मांझी को अपनी पत्नी के शव को अपने कंधे पर लेकर करीब 12 किलोमीटर तक चलना पड़ा। उसे अस्पताल से शव को घर तक ले जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिला। दाना मांझी के साथ उसकी 12 वर्षीय बेटी भी थी। बुधवार सुबह स्थानीय लोगों ने दाना मांझी को अपनी पत्नी अमंग देई के शव को कंधे पर लादकर ले जाते हुये देखा। 42 वर्षीय वर्षीय महिला की मंगलवार रात को भवानीपटना में जिला मुख्यालय अस्पताल में टीबी से मौत हो गई थी।
सरकार से नहीं मिली सुविधा-
स्थानीय नवीन पटनायक सरकार ने फरवरी में ‘महापरायण’ नामक योजना शुरू की। इसके तहत शव को सरकारी अस्पताल से मृतक के घर तक मुफ्त में पहुंचाने की सुविधा दी जाती है, लेकिन दाना मांझी को यह सुविधा नहीं मिली। मांझी ने इस बाबत अस्पताल के अधिकारियों से बहुत मिन्नतें की, बावजूद इसके उन्हें किसी तरह की मदद नहीं मिली। अंतत: उन्होंने अपनी पत्नी के शव को एक कपड़े में लपेटा और उसे कंधे पर लादकर भवानीपटना से करीब 60 किलोमीटर दूर रामपुर ब्लॉक के मेलघारा गांव के लिए पैदल चलना शुरू कर दिया।

Tuesday, August 23, 2016

#Humanity, अाज के दधिची: दिल्ली के गुप्ता परिवार के 38 लोगों ने लिया अंगदान का प्रण




बलिराम सिंह, नई दिल्ली
यदि आपके दिल में सेवाभाव है और दूसरों के जीवन में उजाला लाना चाहते हैं तो इसके लिए आप दिल्ली मेडिकल ऐसाेसिएशन के अध्यक्ष डॉ.राकेश गुप्ता के परिवार से नसीहत ले सकते हैं। डॉ.राकेश गुप्ता के परिवार के एक, दो सदस्य नहीं बल्कि पूरे 38 सदस्यों ने अंगदान के लिए शपथ लिया है और इसके लिए बकायदा आवेदन फाॅर्म भरा है कि यदि किसी दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाती है अथवा ब्रेन डेड कर जाते हैं तो जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उजाला लाने के लिए उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का सदुपयोग कर लिया जाए।
डॉ.राकेश गुप्ता को अंगदान की यह प्रेरणा उनकी माता जी भगवती देवी से मिली। भगवती देवी का निधन 29 जून 2009 में हुई, लेकिन उन्होंने अपना नेत्रदान किया और दो लोगों के जीवन में उजाला लाया। माताजी की इस प्रेरणादायी कार्य का सर्वाधिक असर डॉ.राकेश गुप्ता की बिटिया साक्षी गुप्ता पर पड़ा। साक्षी गुप्ता फिलहाल वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं। अपनी दादी जी के सपने को साकार करने के लिए साक्षी ने अपने परिवार के सभी सदस्यों काे अंग दान के लिए प्रेरित किया। साक्षी कहती हैं कि सामाज के लिए हमारी भी नैतिक जिम्मेदारी है। यदि हम अंगदान के लिए आगे आए तो जरूरतमंदों को जीवन में उजाला आ जाएगा।
नर सेवा, नारायण सेवा-
डॉ.राकेश गुप्ता कहते हैं कि वास्तव में नर सेवा ही नारायण सेवा है। हमारा शरीर बहुत बहुमूल्य है, मृत्यु के बाद भी मानव सेवा के लिए हम इसका सदुपयोग कर सकते हैं। डॉ.गुप्ता कहते हैं कि एक व्यक्ति अपने शरीर के दान से 20 लोगों के जीवन में उजाला ला सकता है। 



भरा-पूरा परिवार-
डॉ.राकेश गुप्ता का परिवार काफी लंबा है। डॉ.गुप्ता चार भाई और दो बहन हैं। सभी भाइयों और बहनों तथा उनके बच्चों ने अंगदान के लिए फार्म भरा है। डॉ.गुप्ता की माताजी भगवती देवी के अलावा उनकी बड़ी बहन विमला के पति ओमप्रकाश भी नेत्र दान कर चुके हैं। डॉ.गुप्ता एक आर्थोपेडिक सर्जन हैं और उनकी पत्नी डॉ.रजनी गुप्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ। इसके अलावा परिवार के अधिकांश सदस्य उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।
इन्होंने लिया अंगदान करने का प्रण-
1.बड़ी बहन विमला देवी –
-दामाद अतुल-बेटी भारती-इनके दो बच्चे अक्षित और आशिमा,
-बेटा अरविंद-बहू अंजू-इनका बेटा अभिषेक
2.बड़े भाई प्रेम नारायण गुप्ता-भाभी सरला देवी
-बेटा प्रदीप-बहू रिंकू
-बेटा अमित-बहू ज्योति
-दामाद अनुज-बेटी अन्नू
3.बड़े भाई नरेश कुमार गुप्ता-भाभी मंजू गुप्ता
बेटी मीनू और निधि, बेटा जतिन
4.बड़े भाई विनेश गुप्ता- भाभी शिखा-
-दामाद पुनीत-बेटी शिल्पी
-बेटा अक्षय-बहू श्रुति
5.बड़ी बहन सुनीता-बहनोई सतीश-
-दामाद संदीप-बेटी रुचि
-बेटा रोहित-बहू नेहा
6.डॉ.राकेश कुमार गुप्ता और डॉ.रजनी गुप्ता-
-बेटा अनुज-बहू नेहा
-बेटी साक्षी
देश में अंगदान की जरूरत-
सलाना किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत- एक से दो लाख
दानदाताओं की कमी की वजह से केवल 10 हजार लोगों को ही मिल पाती है किडनी
सलाना लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत-लगभग 60 हजार
दानदाताओं की कमी की वजह से 5 हजार मरीजों को ही मिलता है लीवर
सलाना नेत्र की जरूरत- 50 हजार के करीब
दानदाताओं के अभाव में केवल 20 हजार लोगों को ही मिलपाती है कार्निया

Sunday, August 21, 2016

19 नवंबर से शुरू होगा ‘त्वांग तीर्थ यात्रा’, गुवाहाटी से अरुणांचल प्रदेश के बुमला तक जाएगा जत्था

बलिराम सिंह, नई दिल्ली
पूर्वोत्तर राज्यों के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए छठां ‘त्वांग तीर्थ यात्रा 2016’ आगामी 19 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। यह यात्रा असम के गुहावाटी से 19 नवंबर को शुरू होगी और पूर्वाेत्तर राज्य अरुणांचल प्रदेश के अंतिम छोर तक यात्रा करने के बाद 24 नवंबर को वापस गुवाहाटी आकर समाप्त हो जाएगी। यात्रा के लिए 15 हजार रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। यात्रा में जाने वाले श्रद्धालुओं को बकायदा अपना पंजीकरण कराना होगा। माना जा रहा है कि इस बार यात्रा में 500 के करीब श्रद्धालु भाग लेंगे।
इन प्रमुख स्थलों का करेंगे दर्शन-
1.मां कामाख्या देवी मंदिर
2.महादेव मंदिर
3.भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरूद्ध जी का अग्निगढ़ मंदिर
4.अरुणांचल प्रदेश का प्रवेश द्वारा ‘भालुकपांेग’
5.पश्चिमी कामेंग जिला का मुख्यालय बोमडीला, जहां 1962 के युद्ध में चनी ने कब्जा कर लिया था
6.वीर सैनिक जसवंत सिंह की स्मृति में बना जसवंत गढ़
7.भारत चीन युद्ध के दौरान हुए शहीदों का शहीद स्मारक
8.तिब्बत के छठे दलाई लामा जी के जन्मस्थल त्वांग में निर्मित विशाल त्वांग मठ
9.दलाई लामा के पद चिन्ह्
10.श्री नानक देव जी की तपस्या स्थली पर बना ‘नानक लामा का तपस्या स्थल’
11.1962 में भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए जोगिंगद बाबा जी का मंदिर
12.धरती पूजन स्थल
सूर्य की धरती अरुणांचल प्रदेश-
चूंकि सूर्य की सबसे पहली किरण अरुणांचल प्रदेश में आने के कारण इसे सूर्य की धरती भी कहते हैं। त्वांग बहुत ही खूबसुरत स्थल है।
भारत का अंतिम छोर बुमला-
बुमला भारत का अंतिम छोर है। इसके आगे तिब्बत शुरू हो जाता है। भारत तिब्बत सहयोग मंच के तत्वाधान में शुरू यह छठां यात्रा है। दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष अनिल मोंगा कहते हैं कि इस यात्रा के जरिए उत्तर-पूर्व के राज्यों को भारत के अन्य हिस्सों से सांस्कृतिक तौर पर जोड़ना है। यह एक सदभाव यात्रा है।