बलिराम सिंह, नई दिल्ली
पूर्वोत्तर राज्यों के
प्रमुख दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए छठां ‘त्वांग तीर्थ यात्रा 2016’ आगामी 19
नवंबर से शुरू होने जा रहा है। यह यात्रा असम के गुहावाटी से 19 नवंबर को शुरू
होगी और पूर्वाेत्तर राज्य अरुणांचल प्रदेश के अंतिम छोर तक यात्रा करने के बाद 24
नवंबर को वापस गुवाहाटी आकर समाप्त हो जाएगी। यात्रा के लिए 15 हजार रुपए शुल्क
निर्धारित किया गया है। यात्रा में जाने वाले श्रद्धालुओं को बकायदा अपना पंजीकरण
कराना होगा। माना जा रहा है कि इस बार यात्रा में 500 के करीब श्रद्धालु भाग
लेंगे।
इन प्रमुख स्थलों का करेंगे दर्शन-
1.मां कामाख्या देवी मंदिर
2.महादेव मंदिर
3.भगवान श्रीकृष्ण के
पौत्र अनिरूद्ध जी का अग्निगढ़ मंदिर
4.अरुणांचल प्रदेश का
प्रवेश द्वारा ‘भालुकपांेग’
5.पश्चिमी कामेंग जिला का
मुख्यालय बोमडीला, जहां 1962 के युद्ध में चनी ने कब्जा कर लिया था
6.वीर सैनिक जसवंत सिंह की
स्मृति में बना जसवंत गढ़
7.भारत चीन युद्ध के दौरान
हुए शहीदों का शहीद स्मारक
8.तिब्बत के छठे दलाई लामा
जी के जन्मस्थल त्वांग में निर्मित विशाल त्वांग मठ
9.दलाई लामा के पद चिन्ह्
10.श्री नानक देव जी की
तपस्या स्थली पर बना ‘नानक लामा का तपस्या स्थल’
11.1962 में भारत-चीन
युद्ध में शहीद हुए जोगिंगद बाबा जी का मंदिर
12.धरती पूजन स्थल
सूर्य की धरती अरुणांचल प्रदेश-
चूंकि सूर्य की सबसे पहली
किरण अरुणांचल प्रदेश में आने के कारण इसे सूर्य की धरती भी कहते हैं। त्वांग बहुत
ही खूबसुरत स्थल है।
भारत का अंतिम छोर बुमला-
बुमला भारत का अंतिम छोर है। इसके आगे तिब्बत शुरू
हो जाता है। भारत तिब्बत सहयोग मंच के तत्वाधान में शुरू यह छठां यात्रा है।
दिल्ली एनसीआर के अध्यक्ष अनिल मोंगा कहते हैं कि इस यात्रा के जरिए उत्तर-पूर्व
के राज्यों को भारत के अन्य हिस्सों से सांस्कृतिक तौर पर जोड़ना है। यह एक सदभाव
यात्रा है।

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