नई दिल्ली
गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्वारा रचित यह भजन
बापू को बहुत प्रिय था। नरसी मेहता ने पंद्रहवीं सदी में इस भजन की रचना की थी और आज
भी यह भजन लाखों-करोड़ों लोगों को प्रिय है। इसकी वजह यह है कि इसमें ऐसे अनमोल वचन
कहे गए हैं जो आज के इस मुश्किल दौर में भी हमें राह दिखा रहे हैं।-
वैष्णव जन तो तेने कहिये,
जे पीड़ पराई जाणे रे,
पर दुक्खे उपकार करे तोये,
मन अभिमान न आणे रे,
सकल लोकमां सहुने वंदे,
निंदा न करे केनी रे,
वाच काछ मन निश्चल राखे,
धन-धन जननी तेनी रे!
रघुपति
राघव राजा राम
लक्ष्माचार्य द्वारा रचित श्रीनामा रामायणम का यह
भजन भी बापू को बहुत प्रिय था।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सीताराम सीताराम,
भज मन प्यारे सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
जय रघुनंदन जय सिया राम,
जानकी वल्लभ सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सीताराम सीताराम,
भज मन प्यारे सीताराम,
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
नोट- यह भजन अपने मूल रूप में इस तरह है
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सुंदर विग्रह मेघश्याम,
गंगा तुलसी शालग्राम।
भद्रगिरीश्वर सीताराम,
भगत-जनप्रिय सीताराम।
जानकीरमणा सीताराम,
जयजय राघव सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
’सावरमती के संत’
इस गीत में बापू के जीवन का दर्शन होता है।-
दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई,
दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई।
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई,
वाह रे फकीर खूब करामात दिखाई।
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
शतरंज बिछा कर यहां बैठा था ज़माना,
लगता था कि मुश्किल है फिरंगी को हराना।
टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था दाना,
पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना।
मारा वो कस के दांव कि उल्टी सभी की चाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े,
मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े।
हिन्दू व मुसलमान सिख पठान चल पड़े,
कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े।
फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी,
लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी।
वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी,
लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी।
दुनियां में तू बेजोड़ था इंसान बेमिसाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया,
तूने वतन की राह में सबकुछ लुटा दिया।
मांगा न कोई तख्त न तो ताज ही लिया,
अमृत दिया सभी को मगर खुद ज़हर पिया।
जिस दिन तेरी चिता जली रोया था महाकाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।