Saturday, October 29, 2016

#Deepawali दीप जलाइए, लेकिन पड़ोस में रहने वाले जरूरतमंद का भी ख्याल रखिएगा




बलिराम सिंह
दोस्तों खुशियों का त्यौहार, दिवाली खूब धूम-धाम से मनाइए, लेकिन यह भी ध्यान रखिएगा कि आपके पड़ोस में कोई परिवार आर्थिक तंगी की वजह से इन खुशियों से दूर तो नहीं है, उस परिवार को भी अपनी खुशी में शामिल कीजिए, कुछ उसे भी सहयोग कीजिए, यही हमारी असली दिवाली होगी। प्रख्यात कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज जी की इस कविता को अपने जेहन में जरूर उतारिए।
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
नई ज्योति के धर नए पंख झिलमिल,
उड़े मर्त्य मिट्टी गगन स्वर्ग छू ले,
लगे रोशनी की झड़ी झूम ऐसी,
निशा की गली में तिमिर राह भूले,
खुले मुक्ति का वह किरण द्वार जगमग,
ऊषा जा न पाए, निशा आ ना पाए
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। 
सृजन है अधूरा अगर विश्‍व भर में,
कहीं भी किसी द्वार पर है उदासी,
मनुजता नहीं पूर्ण तब तक बनेगी,
कि जब तक लहू के लिए भूमि प्यासी,
चलेगा सदा नाश का खेल यूँ ही,
भले ही दिवाली यहाँ रोज आए।
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।
मगर दीप की दीप्ति से सिर्फ जग में,
नहीं मिट सका है धरा का अँधेरा,
उतर क्यों न आयें नखत सब नयन के,
नहीं कर सकेंगे ह्रदय में उजेरा,
कटेंगे तभी यह अँधरे घिरे अब,
स्वयं धर मनुज दीप का रूप आए।
जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना,
अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए। 

Sunday, October 23, 2016

cancer कैंसर की 40 फीसदी बीमारी की मुख्य वजह तंबाकू सेवन


-नियमित दिनचर्या में बदलाव करके 50 फीसदी कैंसर के मामलों को रोक सकते हैं  
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
देश और दुनिया में कैंसर की सबसे प्रमुख वजह तंबाकू उत्पादों का सेवन है और 40 फीसदी कैंसर की बीमारी इसी वजह से होता है। देश की लगभग 35 प्रतिशत आबादी और 13-15 साल के 14.1 फीसदी बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
50 फीसदी बीमारी हो सकती है नियंत्रित-
हम अपनी जीवनशैली में बदलाव करके 50 फीसदी से ज्यादा कैंसर के मामलों को रोक सकते हैं। भारत में हर साल कैंसर के एक मिलीयन (10 लाख) नए मरीज सामने आते हैं और अब इनकी संख्या ढाई मिलीयन (25 लाख) तक पहुंच गई है। हर साल 6 से 7 लाख लोगों की जान चली जाती है।
मोटापे और ज्यादा वजन की वजह से 20 फीसदी कैंसर-
शोध में यह भी पाया गया है कि मोटापे और ज़्यादा वज़न की वजह से 20 प्रतिशत कैंसर के मरीज़ पूरी दुनिया में होते हैं। अगर लोग अपना सेहतमंद बाॅडी मास इंडेक्स रखें तो अगले 2 से 20 सालों में 50 प्रतिशत तक कैंसर के मामले कम हो सकते हैं।
बच्चों को दिलायें वैक्सीन-
बच्चों को उचित समय पर तीन प्रमुख वायरसों हयूमन पापीलोमा वायरस, हेपेटाईटस बी और सी वायरस की वैक्सीन दिलवा कर पूरी दुनिया में कैंसर से जुड़े प्रमुख वायरस को 20 से 40 सालों में पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।
कैंसर के प्रमुख कारक-
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और पद्मश्री अवार्ड विजेता डॉ.केके अग्रवाल कहते हैं कि तंबाकू सेवन, मोटापे, मोबाईल फोन और अन्य बिजली यंत्रों से उत्पन्न  होने वाली रेडिएशन के संपर्क में आने और ओज़ोन की घटती परत से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक होना बेहद ज़रूरी है। लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव के लिए प्रोत्साहित करना भी कैंसर की रोकथाम की ओर एक कदम है। धुम्रपान छोड़ने और शराब का सेवन कम करने, संतुलित और सेहतमंद भोजन खाने और नियमित व्यायाम करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। प्रदूषण की रोकथाम पर भी कारगर कदम उठाया जाना चाहिए।
बीएल कपूर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ.कपिल कुमार का कहना है कि जागरूकता के अभाव में अपर्याप्त डायग्नोसिस होने के कारण कैंसर के 50 फीसदी मरीज तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाते हैं, जिसकी वजह से उनके बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। अत: नियमित जांच और जीवन स्तर में बदलाव लाकर इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Tuesday, October 11, 2016

दो साल पहले अवसाद में थीं दीपिका पादुकोण, उस दौर को याद कर रो पड़ी मस्तानी



-दीपिका ने मानसिक पीड़ितों को अवसाद मुक्त करने का बीड़ा उठाया       
अनिरुद्ध शर्मा, नई दिल्ली
बालीवुड स्टार दीपिका पादुकोण के बारे में यह स्वीकार करना मुश्किल है कि दो साल पहले यह अभिनेत्री अवसाद के दौर से गुजरी थी। सोमवार को अपने अवसाद के अनुभव को साझा करते हुए दीपिका की आंखें छलक उठीं। दीपिका ने कहा, ‘दो साल पहले उनकी मम्मी व पापा और बहन हर महीने की तरह उनसे मिलने बेंगलुरू से मुंबई आए थे। लेकिन जिस सुबह वह जाने को थे तो मैं अपने कमरे में बिस्तर पर इधर-उधर करवटें बदल रही थी, मेरा उठने का मन नहीं था। मेरी मां मेरे पास आईं और पूछा कि सब कुछ ठीक है, मैं कहा, हां। उन्होंने दोबारा पूछा, क्या काम या कोई दूसरी बात तुम्हें परेशान कर रही है? मैंने कहा, नहीं। उन्होंने मुझसे बार-बार पूछा और मैं टूट गई, मेरी आंखों से आंसू बहने लगे।’ यह सब याद करते हुए दीपिका का गला रूंध गया, आंखें भर आईं। आंसु पोंधते हुए उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता था कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा था। मेरी मां ने इसे पहली बार पहचाना और कहा कि क्या हम डॉक्टर से मिलें।
दीपिका ने बताया कि ‘उन दिनों पीकू फिल्म की शूटिंग चल रही थी और सार्वजनिक जीवन में जो भी कमिटमेंट थे, उन्हें भी पूरा करना पड़ रहा था। सबके सामने मुस्कुराना भी पड़ता था, एक्टिंग भी चल रही थीं, एडवर्टाइजिंग, प्राडक्ट लांचिंग भी चल रही थी लेकिन भीड़ में भी अजीब लगता था, अचानक खो-सी जाती थी, अकेलापन और खालीपन महसूस होता था। बार-बार रोने का मन करता था। कभी प्लेन के वॉशरूम में, कभी बंद कमरे में ऐसा होता था लेकिन इसका कोई कारण समझ नहीं आता था। फरवरी से लेकर जून-जुलाई तक करीब चार-पांच महीने ऐसा चला।’ मेरे जीवन के इस सबसे खराब दौर में मेरी बहन, मेरे पापा और परिवार व दोस्तों ने सबने भरपूर साथ दिया। ‘मां के कहने पर मनोचिकित्सक और मनोविज्ञानी दोनों से परामर्श किया और आज मैं बिल्कुल ठीक हूं।’
अवसाद से लड़ने के लिए दीपिका ने पिछले साल 10 अक्टूबर को लिव लव लाइफ फाउंडेशन नामक एक एनजीओ बनाया था। दीपिका का कहना है कि यह अवसाद से गुजर रहे और गुजर चुके लोगों की मदद के लिए है। सोमवार को उन्होंने ‘दोबारा पूछो’ अभियान की शुरूआत करते हुए कहा कि आज हम प्रतिस्पर्धा के दौर में जी रहे हैं लेकिन बेहद असंवेदनशील होते जा रहे हैं। इस अभियान का मकसद लोगों को अधिक संवेदनशील बनाना है। उन्होंने कहा कि आज वक्त आ गया है कि हम खुद इसे स्वीकार करें कि हम अवसाद के दौर में हैं या जो आपके बेहद नजदीक है, जिसके बर्ताव के बारे में आप अच्छे से जानते हैं, उसमें कोई बदलाव देखें तो उससे जरूर पूछें, दोबारा पूछें, बार-बार पूछें कि क्या वह ठीक है, सब ठीकठाक है?
दीपिका ने कहा, जिस दिन मानसिक स्वास्थ्य के साथ जुड़ा ‘धब्बा’ अलग हो जाएगा, समझिए आधी जंग जीत जाएंगे, जहां चाह है, वहां राह है।

Monday, October 10, 2016

दीपिका पादुकोण की संस्था’द लिव, लव, लाॅफ फाउंडेशन’ लोगों को बनाएगा मानसिक रोगियों के प्रति संवेदनशील


बलिराम सिंह, नई दिल्ली
फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की संस्था ’द लिव, लव, लाॅफ फाउंडेशन’ लोगों को मानसिक रूप से पीड़ित मरीजों के प्रति संवेदनशील बनाएगा। इस बाबत फाउंडेशन ने ’दोबारा पूछो’ नाम से एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान को देश का पहला राष्ट्रीय स्तर का पब्लिक अवेयरनेस कैंपेन बताया जा रहा है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्रत्री अनुप्रिया पटेल की उपस्थिति में इस अभियान को शुरू किया गया।
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मानसिक रोगों की बढ़ती समस्याएं ध्यान मांगती हैं। सरकार इन समस्याओं को दूर करने के लिए संसाधन विकसित और वितरित कर रही है। उन्होंने सिविल सोसायटी, कारपोरेशंस और पेशेवरों को समस्याओं के हल और मुहिम को लगातार बनाए रखने के लिए अपना विशेष योगदान देने की अपील की।
दीपिका पादुकोण ने इस मौके पर कहा कि मानसिक रोगों का सामना कर रहे लोगों को प्रेम और सहायता की आवश्यकता होती है। इस संस्था द्वारा शुरू किए गए ’दोबारा पूछो’ अभियान हमें मानसिक रोग से पीड़ित लोगों के प्रति और ज्यादा संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करेगा, ताकि हम पीड़ितों की ओर ध्यान दें और उचित कदम उठाने के लिए उनका मार्गदर्शन करें। उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि इस अभियान से सामाजिक कलंक को कम करने में बड़ी सफलता मिलेगी। इस मौके पर प्रसून जोशी ने कहा कि अक्सर अभिवादन के रूप में पूछे जाने वाले सवाल से हमें व्यक्ति की समस्याओं के बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक 10 में से एक भारतीय अवसाद और बेचैनी से प्रभावित है। इस मौके पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ.केके अग्रवाल भी उपस्थित थें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक 10 फीसदी भारतीय आबादी मानसिक रोगों से ग्रस्त है, उनमें से 80 फीसदी डिप्रैस्सड या बेचैनी से पीड़ित हैं, जबकि शेष 20 फीसदी गंभीर मानसिक समस्या जैसे साईकोसिस, बायोपोरडिस आर्डर, सिजोफ्रेनिया इत्यादि से पीड़ित हैं। आंकड़े के मुताबिक 2013 में भारत में मानसिक बीमारी की वजह से 31 मिलियन लोगों ने स्वस्थ जीवन खो दिया। वर्ष 2025 तक यह अनुमान 38.1 करोड़ तक पहुंच जाएगी। अर्थात 12 सालों में 23 फीसदी की वृद्धि होगी।

Sunday, October 2, 2016

GANDHI'S FAVORITE HYMNS- बापू के प्रिय भजन


नई दिल्ली
गुजरात के संत कवि नरसी मेहता द्वारा रचित यह भजन बापू को बहुत प्रिय था। नरसी मेहता ने पंद्रहवीं सदी में इस भजन की रचना की थी और आज भी यह भजन लाखों-करोड़ों लोगों को प्रिय है। इसकी वजह यह है कि इसमें ऐसे अनमोल वचन कहे गए हैं जो आज के इस मुश्किल दौर में भी हमें राह दिखा रहे हैं।-
वैष्णव जन तो तेने कहिये,
जे पीड़ पराई जाणे रे,
पर दुक्खे उपकार करे तोये,
मन अभिमान न आणे रे,
सकल लोकमां सहुने वंदे,
निंदा न करे केनी रे,
वाच काछ मन निश्चल राखे,
धन-धन जननी तेनी रे!
        रघुपति राघव राजा राम
लक्ष्माचार्य द्वारा रचित श्रीनामा रामायणम का यह भजन भी बापू को बहुत प्रिय था।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सीताराम सीताराम,
भज मन प्यारे सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
जय रघुनंदन जय सिया राम,
जानकी वल्लभ सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सीताराम सीताराम,
भज मन प्यारे सीताराम,
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
नोट- यह भजन अपने मूल रूप में इस तरह है
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।
सुंदर विग्रह मेघश्याम,
गंगा तुलसी शालग्राम।
भद्रगिरीश्वर सीताराम,
भगत-जनप्रिय सीताराम।
जानकीरमणा सीताराम,
जयजय राघव सीताराम।
रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम।

           ’सावरमती के संत’
इस गीत में बापू के जीवन का दर्शन होता है।-
दे दी हमें आज़ादी बिना खड्‌ग बिना ढाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
आंधी में भी जलती रही गांधी तेरी मशाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
धरती पे लड़ी तूने अजब ढंग की लड़ाई,
दागी न कहीं तोप न बंदूक चलाई।
दुश्मन के किले पर भी न की तूने चढ़ाई,
वाह रे फकीर खूब करामात दिखाई।
चुटकी में दुश्मनों को दिया देश से निकाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
शतरंज बिछा कर यहां बैठा था ज़माना,
लगता था कि मुश्किल है फिरंगी को हराना।
टक्कर थी बड़े ज़ोर की दुश्मन भी था दाना,
पर तू भी था बापू बड़ा उस्ताद पुराना।
मारा वो कस के दांव कि उल्टी सभी की चाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
जब जब तेरा बिगुल बजा जवान चल पड़े,
मजदूर चल पड़े थे और किसान चल पड़े।
हिन्दू व मुसलमान सिख पठान चल पड़े,
कदमों पे तेरे कोटि कोटि प्राण चल पड़े।
फूलों की सेज छोड़ के दौड़े जवाहरलाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लंगोटी,
लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी।
वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी,
लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की भी चोटी।
दुनियां में तू बेजोड़ था इंसान बेमिसाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।
जग में कोई जिया है तो बापू तू ही जिया,
तूने वतन की राह में सबकुछ लुटा दिया।
मांगा न कोई तख्त न तो ताज ही लिया,
अमृत दिया सभी को मगर खुद ज़हर पिया।
जिस दिन तेरी चिता जली रोया था महाकाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।