-दीपिका
ने मानसिक पीड़ितों को अवसाद मुक्त करने का बीड़ा उठाया
अनिरुद्ध
शर्मा, नई दिल्ली
बालीवुड स्टार दीपिका पादुकोण के बारे
में यह स्वीकार करना मुश्किल है कि दो साल पहले यह अभिनेत्री अवसाद के दौर से
गुजरी थी। सोमवार को अपने अवसाद के अनुभव को साझा करते हुए दीपिका की आंखें छलक
उठीं। दीपिका ने कहा, ‘दो साल पहले उनकी मम्मी व पापा और बहन हर महीने की तरह उनसे
मिलने बेंगलुरू से मुंबई आए थे। लेकिन जिस सुबह वह जाने को थे तो मैं अपने कमरे
में बिस्तर पर इधर-उधर करवटें बदल रही थी, मेरा उठने का मन नहीं था। मेरी मां मेरे
पास आईं और पूछा कि सब कुछ ठीक है, मैं कहा, हां। उन्होंने दोबारा पूछा, क्या काम
या कोई दूसरी बात तुम्हें परेशान कर रही है? मैंने कहा, नहीं। उन्होंने मुझसे
बार-बार पूछा और मैं टूट गई, मेरी आंखों से आंसू बहने लगे।’ यह सब याद करते हुए
दीपिका का गला रूंध गया, आंखें भर आईं। आंसु पोंधते हुए उन्होंने कहा कि मुझे नहीं
पता था कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा था। मेरी मां ने इसे पहली बार पहचाना और कहा
कि क्या हम डॉक्टर से मिलें।
दीपिका ने बताया कि ‘उन दिनों पीकू
फिल्म की शूटिंग चल रही थी और सार्वजनिक जीवन में जो भी कमिटमेंट थे, उन्हें भी
पूरा करना पड़ रहा था। सबके सामने मुस्कुराना भी पड़ता था, एक्टिंग भी चल रही थीं,
एडवर्टाइजिंग, प्राडक्ट लांचिंग भी चल रही थी लेकिन भीड़ में भी अजीब लगता था,
अचानक खो-सी जाती थी, अकेलापन और खालीपन महसूस होता था। बार-बार रोने का मन करता
था। कभी प्लेन के वॉशरूम में, कभी बंद कमरे में ऐसा होता था लेकिन इसका कोई कारण
समझ नहीं आता था। फरवरी से लेकर जून-जुलाई तक करीब चार-पांच महीने ऐसा चला।’ मेरे
जीवन के इस सबसे खराब दौर में मेरी बहन, मेरे पापा और परिवार व दोस्तों ने सबने
भरपूर साथ दिया। ‘मां के कहने पर मनोचिकित्सक और मनोविज्ञानी दोनों से परामर्श
किया और आज मैं बिल्कुल ठीक हूं।’
अवसाद से लड़ने के लिए दीपिका ने पिछले
साल 10 अक्टूबर को लिव लव लाइफ फाउंडेशन नामक एक एनजीओ बनाया था। दीपिका का कहना
है कि यह अवसाद से गुजर रहे और गुजर चुके लोगों की मदद के लिए है। सोमवार को
उन्होंने ‘दोबारा पूछो’ अभियान की शुरूआत करते हुए कहा कि आज हम प्रतिस्पर्धा के
दौर में जी रहे हैं लेकिन बेहद असंवेदनशील होते जा रहे हैं। इस अभियान का मकसद
लोगों को अधिक संवेदनशील बनाना है। उन्होंने कहा कि आज वक्त आ गया है कि हम खुद
इसे स्वीकार करें कि हम अवसाद के दौर में हैं या जो आपके बेहद नजदीक है, जिसके
बर्ताव के बारे में आप अच्छे से जानते हैं, उसमें कोई बदलाव देखें तो उससे जरूर
पूछें, दोबारा पूछें, बार-बार पूछें कि क्या वह ठीक है, सब ठीकठाक है?
दीपिका ने कहा, जिस दिन मानसिक
स्वास्थ्य के साथ जुड़ा ‘धब्बा’ अलग हो जाएगा, समझिए आधी जंग जीत जाएंगे, जहां चाह
है, वहां राह है।

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