Sunday, October 23, 2016

cancer कैंसर की 40 फीसदी बीमारी की मुख्य वजह तंबाकू सेवन


-नियमित दिनचर्या में बदलाव करके 50 फीसदी कैंसर के मामलों को रोक सकते हैं  
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
देश और दुनिया में कैंसर की सबसे प्रमुख वजह तंबाकू उत्पादों का सेवन है और 40 फीसदी कैंसर की बीमारी इसी वजह से होता है। देश की लगभग 35 प्रतिशत आबादी और 13-15 साल के 14.1 फीसदी बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
50 फीसदी बीमारी हो सकती है नियंत्रित-
हम अपनी जीवनशैली में बदलाव करके 50 फीसदी से ज्यादा कैंसर के मामलों को रोक सकते हैं। भारत में हर साल कैंसर के एक मिलीयन (10 लाख) नए मरीज सामने आते हैं और अब इनकी संख्या ढाई मिलीयन (25 लाख) तक पहुंच गई है। हर साल 6 से 7 लाख लोगों की जान चली जाती है।
मोटापे और ज्यादा वजन की वजह से 20 फीसदी कैंसर-
शोध में यह भी पाया गया है कि मोटापे और ज़्यादा वज़न की वजह से 20 प्रतिशत कैंसर के मरीज़ पूरी दुनिया में होते हैं। अगर लोग अपना सेहतमंद बाॅडी मास इंडेक्स रखें तो अगले 2 से 20 सालों में 50 प्रतिशत तक कैंसर के मामले कम हो सकते हैं।
बच्चों को दिलायें वैक्सीन-
बच्चों को उचित समय पर तीन प्रमुख वायरसों हयूमन पापीलोमा वायरस, हेपेटाईटस बी और सी वायरस की वैक्सीन दिलवा कर पूरी दुनिया में कैंसर से जुड़े प्रमुख वायरस को 20 से 40 सालों में पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।
कैंसर के प्रमुख कारक-
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और पद्मश्री अवार्ड विजेता डॉ.केके अग्रवाल कहते हैं कि तंबाकू सेवन, मोटापे, मोबाईल फोन और अन्य बिजली यंत्रों से उत्पन्न  होने वाली रेडिएशन के संपर्क में आने और ओज़ोन की घटती परत से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक होना बेहद ज़रूरी है। लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव के लिए प्रोत्साहित करना भी कैंसर की रोकथाम की ओर एक कदम है। धुम्रपान छोड़ने और शराब का सेवन कम करने, संतुलित और सेहतमंद भोजन खाने और नियमित व्यायाम करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। प्रदूषण की रोकथाम पर भी कारगर कदम उठाया जाना चाहिए।
बीएल कपूर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ.कपिल कुमार का कहना है कि जागरूकता के अभाव में अपर्याप्त डायग्नोसिस होने के कारण कैंसर के 50 फीसदी मरीज तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाते हैं, जिसकी वजह से उनके बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। अत: नियमित जांच और जीवन स्तर में बदलाव लाकर इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

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