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Thursday, November 17, 2016

#ITPO विश्व व्यापार मेला में कैशलेस लेनदेन का हुआ इंतजाम


बलिराम सिंह, नई दिल्ली                    
भारतीय विश्व व्यापार मेला में कैशलेस लेनदेन का इंतजाम किया गया है। भारत व्यापार प्रोत्साहन संस्थान (आईटीपीओ) ने दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (14 नवंबर से 27 नवंबर तक) हिस्सा लेने वालों को कैशलेस लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए हैं। मेला में आने वाले प्रदर्शकों और आगंतुकों को अपनी सेवा देने की अनुमति दी गई है।
भारत सरकार ने इस बाबत निम्न उपाय किए हैं-
एटीएम मशीनों की संख्या 2 से बढ़ाकर 14 कर दी गई है। (मोबाइल एटीएम समेत)
आगंतुकों और प्रदर्शकों को डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के जरिए लेनदने में कोई दिक्कत ना हो, इसके लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक से पर्याप्त मात्रा में स्वाइप मशीन उपलब्ध कराने के लिए साझेदारी की गई है।
मेले में ही कारीगरों का खुलेगा अकाउंट-
सभी छोटे कारीगरों और प्रदर्शकों का बैंक खाता खाेलने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से साझेदारी की गई है, यदि जरूरत पड़ी तो मेला स्थल पर ही उनका अकाउंट खोला जाएगा, जिससे कि स्वाइप मशीन के जरिए उनका अकाउंट खोला जाएगा, जिससे कि वो स्वाइप मशीन के जरिए लेनदेन कर सकें।
टिकट काउंटर यानि गेट नंबर 1 और 2 पर प्रवेश टिकट देने के लिए भी स्वाइप मशीन की व्यवस्था की गई है।
पेटीएम की व्यवस्था-
पेटीएम और फ्रीचार्ज भी विश्व व्यापार मेला में डिजिटल वालेट के जरिए कैशलेस लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहे हैं।

Sunday, October 23, 2016

cancer कैंसर की 40 फीसदी बीमारी की मुख्य वजह तंबाकू सेवन


-नियमित दिनचर्या में बदलाव करके 50 फीसदी कैंसर के मामलों को रोक सकते हैं  
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
देश और दुनिया में कैंसर की सबसे प्रमुख वजह तंबाकू उत्पादों का सेवन है और 40 फीसदी कैंसर की बीमारी इसी वजह से होता है। देश की लगभग 35 प्रतिशत आबादी और 13-15 साल के 14.1 फीसदी बच्चे तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
50 फीसदी बीमारी हो सकती है नियंत्रित-
हम अपनी जीवनशैली में बदलाव करके 50 फीसदी से ज्यादा कैंसर के मामलों को रोक सकते हैं। भारत में हर साल कैंसर के एक मिलीयन (10 लाख) नए मरीज सामने आते हैं और अब इनकी संख्या ढाई मिलीयन (25 लाख) तक पहुंच गई है। हर साल 6 से 7 लाख लोगों की जान चली जाती है।
मोटापे और ज्यादा वजन की वजह से 20 फीसदी कैंसर-
शोध में यह भी पाया गया है कि मोटापे और ज़्यादा वज़न की वजह से 20 प्रतिशत कैंसर के मरीज़ पूरी दुनिया में होते हैं। अगर लोग अपना सेहतमंद बाॅडी मास इंडेक्स रखें तो अगले 2 से 20 सालों में 50 प्रतिशत तक कैंसर के मामले कम हो सकते हैं।
बच्चों को दिलायें वैक्सीन-
बच्चों को उचित समय पर तीन प्रमुख वायरसों हयूमन पापीलोमा वायरस, हेपेटाईटस बी और सी वायरस की वैक्सीन दिलवा कर पूरी दुनिया में कैंसर से जुड़े प्रमुख वायरस को 20 से 40 सालों में पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।
कैंसर के प्रमुख कारक-
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और पद्मश्री अवार्ड विजेता डॉ.केके अग्रवाल कहते हैं कि तंबाकू सेवन, मोटापे, मोबाईल फोन और अन्य बिजली यंत्रों से उत्पन्न  होने वाली रेडिएशन के संपर्क में आने और ओज़ोन की घटती परत से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक होना बेहद ज़रूरी है। लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव के लिए प्रोत्साहित करना भी कैंसर की रोकथाम की ओर एक कदम है। धुम्रपान छोड़ने और शराब का सेवन कम करने, संतुलित और सेहतमंद भोजन खाने और नियमित व्यायाम करने से इस समस्या से बचा जा सकता है। प्रदूषण की रोकथाम पर भी कारगर कदम उठाया जाना चाहिए।
बीएल कपूर सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कैंसर सेंटर के निदेशक डॉ.कपिल कुमार का कहना है कि जागरूकता के अभाव में अपर्याप्त डायग्नोसिस होने के कारण कैंसर के 50 फीसदी मरीज तीसरे या चौथे चरण में पहुंच जाते हैं, जिसकी वजह से उनके बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। अत: नियमित जांच और जीवन स्तर में बदलाव लाकर इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Thursday, September 15, 2016

Dengue - chikungunya डेंगू-चिकनगुनिया से पर्यटक उद्योग को लग सकता है झटका, -अमेरिकी दूतावास ने जारी की हैल्थ एडवाइजरी


गोल्डन ट्राईएंगल सर्किट में आते हैं 35 फीसदी विदेशी पर्यटक
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
यदि डेंगू-चिकनगुनिया पर जल्द ब्रेक नहीं लगाया गया तो देश के पर्यटन उद्योग और हवाई यात्रा उद्योग को गहरा झटका लग सकता है।  देश की उद्योग जगत की प्रमुख संस्था एसोचैम ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को आगाह किया है कि यदि राजधानी में चिकनगुनिया और डेंगू पर तत्काल रोक नहीं लगाई गई तो पर्यटन उद्योग और एविएशन (हवाई यात्रा) उद्योग को गहरा झटका लग सकता है और अरबों रूपए का नुकसान हो सकता है। डेंगू-चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी पर्यटकों के लिए एक हैल्थ एडवाइजरी भी जारी किया है।
एसोचैम के मुताबिक भारत में आने वाले 35 फीसदी विदेशी यात्री दिल्ली में आते हैं, अथवा दिल्ली से होते हुए पड़ोसी राज्यों के पर्यटक स्थलों पर घूमने जाते हैं। चूंकि विदेशी पर्यटकों को दिल्ली आकर्षित करती है। इसलिए देश के एक तिहाई पर्यटक दिल्ली में आते हैं अथवा यहां से गुजरते हैं। उद्योग जगत को चिंता है कि अक्टूबर से भारत में पर्यटन का पीक सीजन शुरू हो जाता है। डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बढ़ती बीमारियों की वजह से दिल्ली में पर्यटकों की संख्या में गिरावट आ रही है, जिसका प्रतिकूल असर पश्चिमी भारत के जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, बिकानेर, जैसलमेर और अन्य पर्यटन स्थलों पर पड़ रहा है। सर्दियों के मौसम में गोल्डन ट्राईएंगल सर्किट (दिल्ली-आगरा-जयपुर) ढाई से तीन लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत कहते हैं कि लगभग 30 फीसदी पर्यटक प्रति महीने दिल्ली के जरिए गोल्डन ट्राएंगल क्षेत्र में आते हैं।
होटल उद्योग को भी झटका-
राजधानी में बढ़ते डेंगू-चिकनगुनिया का पर्यटकों पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसकी वजह से होटल्स, एयरलाइंस, टैक्सी ऑपरेर्ट्स, रेस्टोरेंट इत्यादि कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे में कई टूर ऑपरेटर अक्टूबर से शुरू होने वाले पर्यटन सीजन के मद्देनजर आवश्यक सावधानियां बरतने लगे हैं।
अमेरिकी दूतावास ने जारी की एडवाइजरी-
भारत में आने वाले अमेरिकी पर्यटकों के लिए अमेरिकी दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर हैल्थ एडवाइजरी जारी करके बताया है कि भारत के कुछ हिस्सों में मच्छर जनित बीमारियां डेंगू और चिकनगुनिया की स्थिति विस्फोटक हो गई है। इसी तरह की एडवाइजरी पूर्व में यूके दूतावास भी जारी कर चुका है।
दो बिलियन डॉलर की होती है कमाई-
सर्दियों के मौसम में एक महीने के अंदर लगभग दो बिलियन (2 अरब) अमेरिकी डॉलर की कमाई पर्यटन उद्योग से होती है।
जुलाई 2016 में आने वाले विदेशी पर्यटकों का आंकड़ा-
जुलाई 2015 में भातर में आने वाले टॉप 15 देशों में सर्वाधिक (17.30 फीसदी) पर्यटक बंग्लादेश से आए। इसके अलावा अमेरिका से 16.51 फीसदी, मलेशिया से 3.49 फीसदी, फ्रांस से 3.12 फीसदी, श्रीलंका से 2.94 फीसदी, कनाडा से 2.66 फीसदी, चीन से 2.32 फीसदी, जर्मनी से 2.31 फीसदी, जापान से 2.20 फीसदी, आस्ट्रेलिया से 2.20 फीसदी, नेपाल से 2.04 फीसदी, ओमान से 2.04 फीसदी, यूएई से 1.99 फीसदी और पाकिस्तान से 1.66 फीसदी पर्यटक भारत आए।
सार्वधिक विदेशी पर्यटक आने वाले भारत के टॉप 15 पोर्ट्स-
जुलाई महीने में सर्वाधिक 26.22 फीसदी विदेशी पर्यटक दिल्ली हवाई अड्‌डे पर आए। इसके अलावा 17.04 फीसदी मुंबई एयरपोर्ट, 10.11 फीसदी चेन्नई एयरपोर्ट, 9.82 फीसदी हरिदासपुर लैंड चेक पोस्ट, 7.31 फीसदी बंगलूरु एयरपोर्ट, 5.14 फीसदी कोचिन एयरपोर्ट, 5.04 फीसदी हैदराबाद एयरपोर्ट, 4.02 फीसदी कोलकात्ता एयरपोर्ट, 1.97 फीसदी गेडे रेल, 1.91 फीसदी अहमदाबाद एयरपोर्ट, 1.91 त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट, 1.55 फीसदी त्रिचुलापल्ली एयरपोर्ट, 1.09 फीसदी अटारी-बाघा लैंड चेक पोस्ट, 0.97 फीसदी अमृतसर एयरपोर्ट अौर 0.71 फीसदी पर्यटक घोजादंगा लैंड चेक पोस्ट के जरिए आए। भारत ने वर्ष 2020 तक दुनिया के एक फीसदी पर्यटक और वर्ष 2025 तक दो फीसदी पर्यटकों को भारत में आकर्षित करने का लक्ष्य है।

Thursday, August 11, 2016

Understanding Buddha Nature: The Doctrine of Good Karmas

Baliram Singh, New Delhi
The term ‘Buddha’, ‘Krishna’, ‘Wahe Guru’ or Brahma does not pertains to a person but to the ever-pervading life force, the GOD consciousness.
 According to the Buddhist philosophy, all human beings possess Buddha nature. But just as the clouds cover the sun, the three layers of mind, intellect and ego cover our true loving nature. This true nature is controlled by the cycles of our actions and karma. Each action, good or bad, leads to a memory, and the resultant desires due to memory conditioning instigate us to do those karmas again. Desire controls our five senses. Most of the times, we live in slavery of our sensual pleasures. 
By nature, all human beings are pure like water. It is the stains of bad karma which makes them look dirty.  
Tulku Thondup in his book “The Healing Power of Mind” writes “In the womb of a pregnant woman, although there is a child, we cannot see it, likewise we do not see our own ultimate sphere, which is covered by our emotional afflictions.” 
Your true consciousness is embedded in each and every cell of the body. It is like putting sugar into the milk; once it is dissolved, you can only taste it but cannot physically find it. Buddha Nature can only be achieved by building positive Karmas. Darkness cannot be removed manually but even a ray of light can make a lot of difference. 
Positive Karmas are the key to success. In thoughts, speech, and deeds, one should only perform positive Karma’s.
Love is our universal nature. Spreading the message of love can help one get rid of the past bad Karma’s. There are many examples of Do’s in various teachings guiding us how to perform good actions. One can follow either the four-way test of Rotary, eight limbs of Patanjali Yoga, seven spiritual laws of Deepak Chopra or ten commandments or teachings of Gita, Guru Granth Sahib, Bible and Buddha.
But the simple prescription is not to sleep, unless one has done one good deed on
that day.
(writer- Dr. K K Aggarwal, Padma Shri Awardee and President Heart Care Foundation of India)