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Wednesday, March 4, 2015

मात्र 1360 रुपए में करें वाराणसी से काठमांडू तक बस यात्रा


12 घंटे में पहुंचे सारनाथ से काठमांडु

वाराणसी -
 उप्र से नेपाल की राजधानी काठमांठू को सीधी बस सेवा से जोड़ दिया गया है। बुधवार को नेपाल के लिए चलने वाली मैत्री बस सेवा को उप्र के मुख््यमंत्री अखिलेश यादव ने हरी झंडी दिखायी। प्रतिदिन चलने वाली वाराणसी-काठमांडू बस सेवा का किराया 1360 रूपये है। रखा गया है। करीब 12 घंटे में 604 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान बस आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर से सोनौली सीमा से नेपाल में प्रवेश करेगी। बस सेवा के टिकट ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं।
      उप्र परिवहन के नोडल अधिकारी पीके बोस ने कहा कि शुरूआती दिन इस बस में जो भी यात्रा करेंगे उन्हें किराए में 30 फीसदी की छूट मिलेगी। इसके साथ ही उन्हें मिठाई का एक डिब्बा और बनारसी सिल्क का परिधान भी उपहार में दिया जाएगा। 31 मार्च तक इस बस में यात्रा करने वालों को 10 फीसदी का डिस्काउंट मिलेगा और एक अप्रैल से पूरा किराया वसूला जाएगा।

Saturday, January 10, 2015

सम्राट अशोक की लाट को शीशे से किया गया संरक्षित


बलिराम सिंह, नई दिल्ली

राष्ट्रीय धरोहर सम्राट अशोक की लाट को अब शीशे से संरक्षित किया जाएगा। सम्राट अशोक की ऐतिहासिक व इस राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण की कवायद पूरी कर ली गई है। काशी के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल और बौद्ध अनुयायियों के आस्था के केन्द्र सारनाथ में रखे गए इस लाट के चारों ओर शीशा लगाया गया है।
चूंकि अब तक खुले में रहने की वजह से इस ऐतिहासिक धरोहर पर मौसम की मार का प्रतिकूल असर पड़ रहा था। इसके चलते लाट पर कई जगह दरारें झलकने लगी थीं। कई बार पर्यटक अपने हाथों से इसे छूते थे। परिणामस्वरूप लाट पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। अत: पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित करने के लिए चारो ओर शीशा लगाया।
बता दें कि लगभग 250 ईसवी पूर्व सम्राट अशोक ने लगभग सवा 15 मीटर ऊंची इस लाट का निर्माण करवाया था। हालांकि बाद में यह यह स्तंभ पांच खंडों में विभक्त हो गया। ये सभी पांचों टुकड़े सारनाथ खंडहर में सुरक्षित हैं। इसी लाट के शीर्ष पर हमारे देश का राष्ट्रीय चिन्ह सिंह विराजमान था। फिलहाल राष्ट्रीय चिन्ह् को सारनाथ संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है।