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Tuesday, December 6, 2016

SocialMedia सोशल मीडिया के जरिए ताकी हसन के इलाज के लिए जुटाई गई 8 लाख रुपए राशि



-ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका से लोगों ने किया सहयोग
-दिल्ली के फोर्टिस फ्लाईट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल में की गई सर्जरी
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
Social media raises funds for life-saving surgery of Lucknow man
यदि आप के पास पैसा नहीं है और आप गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो आप सोशल मीडिया के जरिए चंदा की अपील कर सकते हैं। गंभीर बीमारी से पीड़ित लखनऊ निवासी ताकी हसन को सोशल मीडिया के जरिए 8 लाख रुपए का सहयोग मिला और उनकी जान बचाई गई।
लखनऊ निवासी 35 वर्षीय ताकी हसन के लिए सोशल मीडिया के जरिए अमेरिका और आस्ट्रेलिया के मुस्लिम और सिख समुदायों से रुपए की मदद प्राप्त हुई और इस धनराशि के जरिए एंटीरियर कॉरनिओफेसियल रिसेक्षन सर्जरी के माध्यम से ट्यूमर हटाने में किया गया। यह सर्जरी वसंतकुंज स्थित फोर्टिस फ्लाईट लेफ्टिनेंट राजन ढल अस्पताल में अक्टूबर 2016 की गई। मरीज के हेड, नेक एवं ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टी विभाग के प्रमुख मनदीप एम मल्होत्रा और न्यूरो सर्जरी विभाग के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ.राणापातिर के नेतृत्व वाली चिकित्सकों की टीम ने की।
मरीज विदेश में करता था काम-
ताकी हसन इलेक्ट्रिशियन के तौर पर काम करने विदेश चला गया, लेकिन एक दुर्घटना के दौरान उसके सिर में गंभीर चोट आई और उसका जीवन थोड़े समय के लिए ठहर सा गया। इस घटना के बाद उनकी तबियत खराब होने लगी और चक्कर आने लगे। तत्पश्चात इलाज के लिए ताकी वापस लखनऊ आ गया, जांच में दाईं आंख के ऊपर माथे पर एक ट्यूमर पाया गया। उनकी पहली सर्जरी में ट्यूमर को निकाल दिया गया था। लेकिन उसी जगह पर दो बार फिर ट्यूमर बन गया, जिसके लिए उन्हें बार-बार सर्जरी करानी पड़ी। चौथी सर्जरी के बाद ताकी मानसिक, शारीरिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से लगभग टूट से गए थे।
ट्यूमर का दायरा-
ट्यूमर ने ऑर्बिट, नेत्रगोलक (आईबॉल) और चेहरे पर तेजी से फैल रहा था और लगभग उनके ब्रेन सेल्स तक पहुंच गया।
ऐसे जुटाए गए पैसे-
आस्ट्रेलिया में रहने वाले ताकी के एक संबंधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पैसे की मदद करने की अपील करने की सलाह दी। इस अपील के बाद ताकी को आॅस्ट्रेलिया और अमेरिका से काफी तादाद में लोग मदद के लिए अागे आए। ताकी को आठ लाख रुपए मदद के तौर पर मिले।
सर्जरी के जरिए निकाला गया ट्यूमर-
सर्जरी प्रक्रिया के दौरान उनके दाहिने ललाट से 11 सेमी गुणा 7 सेमी आकार का ट्यूमर के साथ ही क्षतिग्रस्त दाहिने ललाट के साइनस एवं दाएं ऑर्बिट से जुड़े ठोस अल्सर को निकाल दिया गया। उनकी दाईं आईबॉल में चीरा लगाया गया था और सर्जरी वाली जगह को ढंकने के लिए कमर से चमड़े को निकाल कर उनके दाई ओर ललाट से लेकर कानों तक की खाली जगह पर उस स्किन को प्रत्यारोपित किया गया। सर्जरी की प्रक्रिया 16 घंटे लगे।
जटिल थी सर्जरी-
अस्पताल के आंकोप्लास्टी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.मनदीप एस मल्होत्रा ने कहा कि मरीज की स्थिति का विश्लेषण करने पर पाया गया कि उनकी सर्जरी उनके लिए जानलेवा हो सकती है, क्योंकि यह बेहद जटिल मामला था और घातक ट्यूमर काफी फैल चुका था। पूर्व में की गई सर्जरी की वजह से जटिलता और बढ़ गई थी, जिसकी वजह से उन्हें अपनी दाईं आंख गवांनी पड़ी। इस मौके पर ताकी ने कहा कि उन्होंने सभी उम्मीदें खो दी थी और पैसे भी खत्म हो गए थे लेकिन उदार शुभचिंतकों की ओर से पैसे की मदद से मेरी जान बची।

Sunday, August 28, 2016

#Bihar सांसद पप्पू यादव का निवास बना बिहार के मरीजों का ‘सेवाश्रम’, ठहरे हैं 3 सौ मरीज व उनके परिजन, रोजाना बनते हैं 50 नए ओपीडी कार्ड


एक अपील- देश के बड़े शहरों में खुले बड़े अस्पतालों में इलाज के लिए आप भी अपने सांसद पर दबाव डालें, ताकि आपकी समस्या काफी हद तक दूर हो सके 

-मरीजों के रहने, खाने-पीने व छोटे-मोटे खर्च का भी होता है इंतजाम
बलिराम सिंह, नई दिल्ली
जैसे ही आप बिहार के सांसद पप्पू यादव का नाम सुनते हैं, आपके मन में एक बाहुबली सांसद की छवि कौंधती है, लेकिन इस रॉबिनहुड स्टाईल वाले सांसद का एक रूप यह भी है। इसके लिए आपको इस सांसद के निवास पर आना होगा, जहां पर 300 मरीज और उनके परिजन ठहरे हुए हैं। अनेक नकारात्मक खबरों के बावजूद जनता इस सांसद को भारी वोटों से जीताकर भारत के लोकतंत्र के मंदिर ‘संसद’ में बार-बार भेज रही है।
बिहार से बाहर के बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि सांसद पप्पू यादव ऊर्फ राजेश रंजन अपने आवास में पिछले कई वर्षों से ‘सेवाश्रम’ चला रहे हैं। यहां पर सुपौल, पूर्णिया, मधेपुरा सहित उत्तर बिहार से काफी तादाद में मरीज और उनके परिजन ठहरे हुए हैं, जिन्हें मुफ्त में भोजन और ठहरने का इंतजाम किया जाता है। यदि ऐसे इंतजाम देश के हर सांसद करने लगें तो आर्थिक तौर से काफी कमजोर मरीजों की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। 
रोजाना बनते हैं 50 मरीजों के ओपीडी कार्ड-
सदैव सुर्खियों में रहने वाले राजेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव का मानव सेवा का एक रूप यह भी है, जो नई दिल्ली के 11-ए, बलवंत राय मेहता लेन स्थित सांसद निवास में आने पर दिखता है। सांसद पप्पू यादव कहते हैं कि हमारा स्टाफ रोजाना लगभग 50 मरीजों का ओपीडी कार्ड बनवाता है और उन्हें इलाज के लिए एम्स, सफदरजंग जैसे बड़े अस्पतालों में लेकर जाता है। इस बाबत सेवाश्रम में बकायदा 3 स्टाफ रखे गए हैं, जो केवल मरीजों के इलाज में सहयोग करते हैं। इसके अलावा दो स्टाफ पूर्णिया, दो स्टाफ मधेपुरा और 2 स्टाफ पटना में हैं, जो मरीजों को पूर्णिया, मधेपुरा से दिल्ली-पटना जाने का इंतजाम करते हैं। सांसद पप्पू यादव कहते हैं कि केवल दिल्ली में चल रहे सेवाश्रम में मरीजों के निवास और खान-पान व छोटी-मोटी खर्च पर लगभग 12 हजार रुपए रोजाना खर्च होते हैं, इसके अलावा पटना और पूर्णियां में भी मरीजों के इलाज कार्य पर काफी खर्च होता है। यह राशि हमें लोगों के सहयोग से मिलती है। इसके अलावा हमारे घर से अनाज आ जाता है। 
 ‘सेवाश्रम’ में ठहरे कुछ मरीजों की स्थिति-
केस नंबर 1.
बिहार के मधेपुरा निवास मनोज कुमार (45) की किडनी फेल हो गई है। मनोज कुमार पिछले सात महीने से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे हैं। अब उनकी पत्नी बेबी कुमारी किडनी दान करेंगी। इलाज पर पूरा खर्च लगभग सवा सात लाख रुपए खर्च होंगे। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से मनोज कुमार को तीन लाख रुपए का अार्थिक सहयोग मिल गया है। फिलहाल मनोज कुमार मधेपुरा से सांसद व जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पप्पू यादव के निवास पर खोले गए सेवाश्रम में पिछले सात महीने से रह रहे हैं।
केस नंबर 2.
इसी तरह सुपौल जिला के चंद्रदेव कुमार जून 2015 में बाइक से फिसल गए। बिहार में डॉक्टर की गलत सर्जरी की वजह से चंद्रदेव कुमार के दोनों पांव काम करना बंद कर दिए। फिलहाल चंद्रदेव कुमार का इलाज एम्स में चल रहा है। चंद्रदेव कुमार भी अपने परिजनों के साथ सांसद पप्पू यादव के सेवाश्रम में निवास कर रहे हैं। 

केस नंबर 3.
सुपौल जिला के निवासी 9 वर्षीय नीतीश कुमार के परिजन भी अपने बच्चे के साथ पिछले 14 दिनों से सांसद निवास मंे ठहरे हैं। नीतीश कुमार के पांव में चोट के बाद सूजन आ गई। पूर्णिया के निजी डॉक्टर ने नीतीश को कैंसर बताया, लेकिन पटना में दिखाने पर डॉक्टरों ने जांच में कैंसर से इंकार किया। लेकिन वहां भी इलाज में देरी होने की वजह से अब दिल्ली के एम्स में नीतीश कुमार का इलाज चल रहा है। ये सुविधा केवल मनोज कुमार, चंद्रद्रेव  कुमार, नीतीश कुमार को  ही नहीं  मिल रही है, बल्कि बिहार के पूर्णिया निवासी मुंह कैंसर से पीड़ित धनीक लाल मंडल, पेट में गांठ की बीमारी से पीड़ित अमोल कामत, अररिया जिला के शाहिदा सहित लगभग 300 से ज्यादा  मरीज सांसद के ‘सेवाश्रम’ में ठहरे हुए हैं। 
 
एम्स में रोजाना आते हैं 10 हजार मरीज-
बता दें कि एम्स में रोजाना दस हजार के करीब इलाज के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के आने और निवास की कमी की वजह से रात्रि में भारी तादाद में मरीजों को एम्स के बाहर मैट्रो स्टेशन के पास पटरी पर ही रात बिताने को मजबूर होना पड़ता है। अधिकांश मरीजों और उनके परिजनों को इलाज से ज्यादा अस्पताल के बाहर रहने और खाने-पीने में ज्यादा धनराशि खर्च करना पड़ता है। ऐसे में यदि मरीजों को रहने और सस्ता भोजन मिल जाए, तो अन्य राज्यों से आने वाले मरीजों की समस्याएं काफी हद तक दूर हो जाएगी। 


यहां कर सकते हैं फोन-
1.पूर्णिया, बिहार-
रंजन निकेतन, कोर्ट स्टेशन रोड, जिला-पूर्णिया, बिहार
फोन नंबर-06454-227479, 227922
2.दिल्ली
11-ए, बलवंत राय मेहता लेन, कस्तूरबा गांधी मार्ग, नई दिल्ली

Tuesday, August 23, 2016

#Humanity, अाज के दधिची: दिल्ली के गुप्ता परिवार के 38 लोगों ने लिया अंगदान का प्रण




बलिराम सिंह, नई दिल्ली
यदि आपके दिल में सेवाभाव है और दूसरों के जीवन में उजाला लाना चाहते हैं तो इसके लिए आप दिल्ली मेडिकल ऐसाेसिएशन के अध्यक्ष डॉ.राकेश गुप्ता के परिवार से नसीहत ले सकते हैं। डॉ.राकेश गुप्ता के परिवार के एक, दो सदस्य नहीं बल्कि पूरे 38 सदस्यों ने अंगदान के लिए शपथ लिया है और इसके लिए बकायदा आवेदन फाॅर्म भरा है कि यदि किसी दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाती है अथवा ब्रेन डेड कर जाते हैं तो जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उजाला लाने के लिए उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का सदुपयोग कर लिया जाए।
डॉ.राकेश गुप्ता को अंगदान की यह प्रेरणा उनकी माता जी भगवती देवी से मिली। भगवती देवी का निधन 29 जून 2009 में हुई, लेकिन उन्होंने अपना नेत्रदान किया और दो लोगों के जीवन में उजाला लाया। माताजी की इस प्रेरणादायी कार्य का सर्वाधिक असर डॉ.राकेश गुप्ता की बिटिया साक्षी गुप्ता पर पड़ा। साक्षी गुप्ता फिलहाल वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं। अपनी दादी जी के सपने को साकार करने के लिए साक्षी ने अपने परिवार के सभी सदस्यों काे अंग दान के लिए प्रेरित किया। साक्षी कहती हैं कि सामाज के लिए हमारी भी नैतिक जिम्मेदारी है। यदि हम अंगदान के लिए आगे आए तो जरूरतमंदों को जीवन में उजाला आ जाएगा।
नर सेवा, नारायण सेवा-
डॉ.राकेश गुप्ता कहते हैं कि वास्तव में नर सेवा ही नारायण सेवा है। हमारा शरीर बहुत बहुमूल्य है, मृत्यु के बाद भी मानव सेवा के लिए हम इसका सदुपयोग कर सकते हैं। डॉ.गुप्ता कहते हैं कि एक व्यक्ति अपने शरीर के दान से 20 लोगों के जीवन में उजाला ला सकता है। 



भरा-पूरा परिवार-
डॉ.राकेश गुप्ता का परिवार काफी लंबा है। डॉ.गुप्ता चार भाई और दो बहन हैं। सभी भाइयों और बहनों तथा उनके बच्चों ने अंगदान के लिए फार्म भरा है। डॉ.गुप्ता की माताजी भगवती देवी के अलावा उनकी बड़ी बहन विमला के पति ओमप्रकाश भी नेत्र दान कर चुके हैं। डॉ.गुप्ता एक आर्थोपेडिक सर्जन हैं और उनकी पत्नी डॉ.रजनी गुप्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ। इसके अलावा परिवार के अधिकांश सदस्य उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।
इन्होंने लिया अंगदान करने का प्रण-
1.बड़ी बहन विमला देवी –
-दामाद अतुल-बेटी भारती-इनके दो बच्चे अक्षित और आशिमा,
-बेटा अरविंद-बहू अंजू-इनका बेटा अभिषेक
2.बड़े भाई प्रेम नारायण गुप्ता-भाभी सरला देवी
-बेटा प्रदीप-बहू रिंकू
-बेटा अमित-बहू ज्योति
-दामाद अनुज-बेटी अन्नू
3.बड़े भाई नरेश कुमार गुप्ता-भाभी मंजू गुप्ता
बेटी मीनू और निधि, बेटा जतिन
4.बड़े भाई विनेश गुप्ता- भाभी शिखा-
-दामाद पुनीत-बेटी शिल्पी
-बेटा अक्षय-बहू श्रुति
5.बड़ी बहन सुनीता-बहनोई सतीश-
-दामाद संदीप-बेटी रुचि
-बेटा रोहित-बहू नेहा
6.डॉ.राकेश कुमार गुप्ता और डॉ.रजनी गुप्ता-
-बेटा अनुज-बहू नेहा
-बेटी साक्षी
देश में अंगदान की जरूरत-
सलाना किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत- एक से दो लाख
दानदाताओं की कमी की वजह से केवल 10 हजार लोगों को ही मिल पाती है किडनी
सलाना लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत-लगभग 60 हजार
दानदाताओं की कमी की वजह से 5 हजार मरीजों को ही मिलता है लीवर
सलाना नेत्र की जरूरत- 50 हजार के करीब
दानदाताओं के अभाव में केवल 20 हजार लोगों को ही मिलपाती है कार्निया