Tuesday, August 23, 2016

#Humanity, अाज के दधिची: दिल्ली के गुप्ता परिवार के 38 लोगों ने लिया अंगदान का प्रण




बलिराम सिंह, नई दिल्ली
यदि आपके दिल में सेवाभाव है और दूसरों के जीवन में उजाला लाना चाहते हैं तो इसके लिए आप दिल्ली मेडिकल ऐसाेसिएशन के अध्यक्ष डॉ.राकेश गुप्ता के परिवार से नसीहत ले सकते हैं। डॉ.राकेश गुप्ता के परिवार के एक, दो सदस्य नहीं बल्कि पूरे 38 सदस्यों ने अंगदान के लिए शपथ लिया है और इसके लिए बकायदा आवेदन फाॅर्म भरा है कि यदि किसी दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो जाती है अथवा ब्रेन डेड कर जाते हैं तो जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उजाला लाने के लिए उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों का सदुपयोग कर लिया जाए।
डॉ.राकेश गुप्ता को अंगदान की यह प्रेरणा उनकी माता जी भगवती देवी से मिली। भगवती देवी का निधन 29 जून 2009 में हुई, लेकिन उन्होंने अपना नेत्रदान किया और दो लोगों के जीवन में उजाला लाया। माताजी की इस प्रेरणादायी कार्य का सर्वाधिक असर डॉ.राकेश गुप्ता की बिटिया साक्षी गुप्ता पर पड़ा। साक्षी गुप्ता फिलहाल वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही हैं। अपनी दादी जी के सपने को साकार करने के लिए साक्षी ने अपने परिवार के सभी सदस्यों काे अंग दान के लिए प्रेरित किया। साक्षी कहती हैं कि सामाज के लिए हमारी भी नैतिक जिम्मेदारी है। यदि हम अंगदान के लिए आगे आए तो जरूरतमंदों को जीवन में उजाला आ जाएगा।
नर सेवा, नारायण सेवा-
डॉ.राकेश गुप्ता कहते हैं कि वास्तव में नर सेवा ही नारायण सेवा है। हमारा शरीर बहुत बहुमूल्य है, मृत्यु के बाद भी मानव सेवा के लिए हम इसका सदुपयोग कर सकते हैं। डॉ.गुप्ता कहते हैं कि एक व्यक्ति अपने शरीर के दान से 20 लोगों के जीवन में उजाला ला सकता है। 



भरा-पूरा परिवार-
डॉ.राकेश गुप्ता का परिवार काफी लंबा है। डॉ.गुप्ता चार भाई और दो बहन हैं। सभी भाइयों और बहनों तथा उनके बच्चों ने अंगदान के लिए फार्म भरा है। डॉ.गुप्ता की माताजी भगवती देवी के अलावा उनकी बड़ी बहन विमला के पति ओमप्रकाश भी नेत्र दान कर चुके हैं। डॉ.गुप्ता एक आर्थोपेडिक सर्जन हैं और उनकी पत्नी डॉ.रजनी गुप्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ। इसके अलावा परिवार के अधिकांश सदस्य उच्च शिक्षा प्राप्त हैं।
इन्होंने लिया अंगदान करने का प्रण-
1.बड़ी बहन विमला देवी –
-दामाद अतुल-बेटी भारती-इनके दो बच्चे अक्षित और आशिमा,
-बेटा अरविंद-बहू अंजू-इनका बेटा अभिषेक
2.बड़े भाई प्रेम नारायण गुप्ता-भाभी सरला देवी
-बेटा प्रदीप-बहू रिंकू
-बेटा अमित-बहू ज्योति
-दामाद अनुज-बेटी अन्नू
3.बड़े भाई नरेश कुमार गुप्ता-भाभी मंजू गुप्ता
बेटी मीनू और निधि, बेटा जतिन
4.बड़े भाई विनेश गुप्ता- भाभी शिखा-
-दामाद पुनीत-बेटी शिल्पी
-बेटा अक्षय-बहू श्रुति
5.बड़ी बहन सुनीता-बहनोई सतीश-
-दामाद संदीप-बेटी रुचि
-बेटा रोहित-बहू नेहा
6.डॉ.राकेश कुमार गुप्ता और डॉ.रजनी गुप्ता-
-बेटा अनुज-बहू नेहा
-बेटी साक्षी
देश में अंगदान की जरूरत-
सलाना किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत- एक से दो लाख
दानदाताओं की कमी की वजह से केवल 10 हजार लोगों को ही मिल पाती है किडनी
सलाना लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत-लगभग 60 हजार
दानदाताओं की कमी की वजह से 5 हजार मरीजों को ही मिलता है लीवर
सलाना नेत्र की जरूरत- 50 हजार के करीब
दानदाताओं के अभाव में केवल 20 हजार लोगों को ही मिलपाती है कार्निया

22 comments:

  1. सिर्फ वे ही हिंदुस्तान के बेटी या बेटे नही है जो राष्ट्रीय / अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कुछ कर दिखाते है .... वो औलादें जो अपनी जरूरत भर का जमा-जुगाड़ करने में ही खपे जा रहे है, वे भी हिन्द की उतनी ही जायज़ औलादें है - प्रेम, परवाह, प्रेरणा और प्रयोजन के आकांक्षी हैं ..... जय जयकार जरूर कीजिए, जज्बाती जरूर बनिए लेकिन हाहाकार भी सुनिए -- ये हाहाकार न सुनने का ही नतीजा है कि हमें जय जयकार के इतने कम अवसर मिलते है !!!
    |||| दिल ही ज़िंदा, न जी ही जीता है
    |||| न तवज्जोह, न इल्तिफ़ात है अब
    |||| इस क़दर जो तफ़ज़्जुलात है अब
    |||| मर चुके पर तवक़्क़ुआत है अब
    ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
    || तवज्जोह = ख़याल; इल्तिफ़ात = परवाह
    || तफ़ज़्जुलात = अचानक बोल पड़ना
    || तवक़्क़ुआत = उम्मीद

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  2. जी सर, घर के अंदर भी सेवा करने वालों को तवज्जो उतनी ही मिलनी चाहिए, जितनी घर के बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर करने वाले को,
    बहुत उम्दा विवेचना, धन्यवाद

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  3. गुप्ता परिवार तो जन्म से ही दानवीर होते हैं, लेकिन अंग दान महादान है, और आपके लेखन ने इस दानवीरता को इस कलयुग में प्रचारित किया इसके लिए आपकी कलम को साधुवाद।

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  4. संजीव गुप्ता जी, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद, आपलोग सदियों से भामाशाह की भूमिका निभाते रहे हैं

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  5. ये तो समाज का बड़प्पन है। जो हमें जिम्मेदारी का एहसास कराता है। वैश्य समुदाय अपनी उदारता के लिए ही जाना जाता है भाई।

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  6. धन्यवाद गुप्ता जी, भारतीय समाज में अंगदान की जागरूकता के अभाव में हजारों जरूरतमंद मरीज दम तोड़ रहे हैं, इसे एक अभियान की तरह फैलाने की जरूरत है, इस महत्वपूर्ण कार्य में आप भी सहभागी बनिए

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  7. हां जी सुना है आपने भी अपने नेत्रदान का फार्म भरा है।

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  8. उसे जमा किया या नहीं?

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  9. अभी नहीं, लेकिन सोच रहा हूं

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  10. अंगदान महादान, बलिराम भाई आपने लोगों को जागरूक करने का बहुत ही सराहनीय प्रयास किया है, आप बधाई के पात्र है।

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  11. धन्यवाद शेखर भाई साहब

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  12. बहुत शानदार स्‍टोरी

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  13. फहीम भाई और रणविजय भाई, बहुत-बहुत धन्यवाद

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  14. नवनीत भाई धन्यवाद

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  15. मैंने भी अपनी आंखे दान करने का फॉर्म भर रखा है। शायद मेरी आंखे किसी के काम आएं।

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  16. धन्यवाद सर, नर सेवा नारायण सेवा, यही तो इंसानियत है

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