Thursday, December 25, 2014

हेलीकाप्टर से लीजिए काशी का मजा


बलिराम सिंह

अब आप हेलीकाप्टर के जरिए काशी के पर्यटन स्थलों का दीदार करेंगे। वाराणसी से आप मिर्जापुर, सोनभद्र, बलिया, गोरखपुर समेत विभिन्न जिलों में दर्शनीय स्थलों को देख सकते हैं। केन्द्रीय सांस्कृति, पर्यटन व उड्डयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ.महेश शर्मा ने बुधवार को इसकी तत्काल प्रभाव से मंजूरी दे दी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर वाराणसी और इसके आसपास के इलाकों को सांस्कृतिक और पयर्टन स्थलों के तर पर विकसित करने के लिए वाराणसी में आयोजित एक संगोष्ठी में केन्द्रीय मंत्री ने यह निर्देश दिया। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि वाराणसी के विकास का खाका अध्यात्मिक नगरी के रूप में खींचकर भारत को पर्यटन हब बनाया जाएगा। हालांकि अभी भी भारत में मनोहारी पर्यटन स्थल होने के बावजूद सलाना महज 70 लाख के करीब विदेशी पर्यटक ही आते हैं। अत: केन्द्रीय मंत्री डॉ.शर्मा ने कहा कि वाराणसी में वह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे पर्यटक काशी आए।
ये सुविधाएं होंगी विकसित-
आधुनिक हवाई अड्डा, पर्यटक बस सेवा, सावरमती की तर्ज पर वरुणा नदी का विकास, सारनाथ में स्मारकों के पास पाथवे, स्मारकों में स्लाइड शो से महात्मय दर्शन, धरोहरों के पास छह माह में टायॅलेट, अस्सी घाट पर लेजर शो, पुरातात्विक महत्व के भवनों का विकास, घाटों पर टिकटिंग व्यवस्था पर विचार।

Sunday, December 7, 2014

बोध गया में बड़े वाहनों के प्रवेश पर लगेगी रोक


बोध गया-

विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने और इस पावन स्थल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बोधगया में बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी। इस बाबत प्रक्रिया शुरू हो गई है। बता दें कि जनवरी के अंतिम सप्ताह में बोध गया में बौद्ध महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन ने बोधगया के नोड-1 और नोड-2 के पास वाहनों के ठहरने की योजना बनाई है। इन दोनों स्थलों पर स्थायी तौर पर बैरिकेटिंग की व्यवस्था की जाएगी। बैरिकेटिंग की ऊंचाई लगभग आठ फीट रहेगी। इसके अलावा बिड़ला धर्मशाला के पास वाहनों के पड़ाव की व्यवस्था की जाएगी।

Sunday, October 12, 2014

म्यांमार से जुड़ा गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट


-नई दिल्ली-गया-वाराणसी-नई दिल्ली सेवा भी शुरू
नई दिल्ली-

 गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट बुधवार को एक और बौद्ध देश से जुड़ गया। बुधवार को मयांमार एयरवेज इंटरनेशनल यंगून-गया-यंगून के बीच उड़ान सेवा शुरू हो गई। इसके अलावा एयर इंडिया ने भी नई दिल्ली-गया-वाराणसी-नई दिल्ली के बीच हवाई सेवा शुरू कर दी।
बता दें कि गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अब नई दिल्ली व कोलकाता के लिए घरेलू उड़ानें सुलभ हो गई है। नई दिल्ली के लिए प्रतिदिन तथा कोलकाता से आने के लिए प्रत्येक शुक्रवार को और कोलकाता जाने के लिए सोमवार व शुक्रवार को विमान सेवा सुलभ रहेगा।

Wednesday, September 24, 2014

दुनिया के 7 मशहूर विश्वविद्यालयों में सर्वाधिक प्राचीन नालंदा


दुनिया के प्राचीन विश्वविद्यालय-

1-प्राचीन नालंदा की स्थापना- 500 ई. के आसपास
2-ऑक्सफोर्ड - 1096 ई.
3-कैंब्रिज   - 1209 ई.
4-पेरिस यूनिवर्सिटी- 1096 ई.
5-अल-कराउइन (मोरक्को)- 859 ई.
6-अल अजहर (मिस्र) - 972 ई.
7-बोलोना यूनिवर्सिटी (इटली)- 1088 ई.
प्राचीन नालंदा, एक नजर-
प्राचीन नालंदा की स्थापना- 500 ई. के आसपास राजा सकरादित्य द्वारा
प्राचीन नालंदा में आने वाले छात्र-शिक्षक- चीन, कोरिया, जापान, मंगोलिया, तिब्बत, श्रीलंका, यूनान, फारस
उत्कर्ष के समय नालंदा में छात्रों की संख्या-10 हजार, शिक्षक-2 हजार
नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट किया-1193 ई. में बख्तियार खिलजी ने
नया नालंदा विश्वविद्यालय एक नजर-   
28 मार्च 2006 को बिहार विधानसभा को संबोधित करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने प्राचीन नालंदा महाविहार की पुनस्र्थापना का आह्वान किया। तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नालंदा महाविहार के प्राचीन खंडहरों से 12 किमी दूर राजगीर में 433 एकड़ भूमि इसके लिए आवंटित कर दी थी।
16 देश कर रहे हैं सहयोग, कुलाधिपति-नोबल पुरस्कार विजेता-अमत्र्य सेन, कुलपति-प्रो. गोपा सब्बरवाल, 15 छात्रों के साथ नए विश्वविद्यालय का प्रथम सत्र 1 सितंबर 2014 से शुरू, प्रति छात्र वार्षिक फीस-एक लाख 60 हजार रुपए

Saturday, September 20, 2014

नालंदा के बाद अब विक्रमशीला विश्वविद्यालय को किया जाएगा पुनर्जीवित


-विक्रमशीला को मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कर दिया था नष्ट
-नालंदा विश्वविद्यालय में शुरू हुई विधिवत पढ़ाई
बलिराम सिंह, नई दिल्ली

नालंदा विश्वविद्यालय के बाद अब विक्रमशीला विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित किया जाएगा। शुक्रवार को नालंदा विश्वद्यिालय में विधिवत पढ़ाई शुरू होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने यह घोषणा की। बता दें कि प्राचीन काल में नालंदा की तरह विक्रमशीला�भी एक महत्वपूर्ण शिक्षा का केन्द्र था, जिसे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित केन्द्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि यह एक नए युग की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्जीवन नहीं है, बल्कि किसी वजह से बीच में विलुप्त हुई परंपरा की फिर से शुरूआत है। उन्होंने कहा कि नालंदा एक परंपरा का नाम है और परंपराएं मरती नहीं हैं। बता दें कि विश्वविद्यालय के पुनर्जीवन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ.एपीजे कलाम के साथ-साथ बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का अहम योगदान है।
विश्वविद्यालय के विकास के लिए अगले 10 वर्षों में केन्द्र सरकार नालंदा विश्वविद्यालय को 2727 करोड़ रुपए देगी।

Saturday, September 13, 2014

वियतनाम को दिया जाएगा महाबोधि का नवजात पौधा


नई दिल्ली

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी अपनी वियतनाम यात्रा के दौरान बिहार के बोधगया स्थित पवित्र बोधिवृक्ष का एक नवजात पौधा वियतनाम के राष्ट्रपति को उपहार स्वरूप भेंट करेंगे। इस पवित्र पौधे को गर्भगृह में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद दिल्ली भेज दिया गया है। बोधगया मंदिर प्र्रबंधन समिति के सचिव एन दोरजी के मुताबिक महाबोधि मंदिर में विशेष पूजा अर्चना और पवित्र महाबोधि वृक्ष की दीर्घायु जीवन की कामना के बाद विशेष दूत के माध्यम से बोधिवृक्ष के नवजात पौधे को दिल्ली भेजा गया है।

Sunday, September 7, 2014

गंगा की लहरों पर ले समुंद्र का मजा, शुरू हुई क्रूज सेवा


-शानो-शौकत से भरपूर क्रूज एमवी पटना से वाराणसी के लिए रवाना
वाराणसी-
समुंद्र की लहरों पर क्रूज का मजा अब आप गंगा की लहरों पर भी ले सकते हैं। पटना से वाराणसी तक गंगा पर क्रूज सेवा शुरू हो गई है। शनिवार को शानो-शौकत से भरपूर क्रूज एमवी पटना के गायघाट से वाराणसी के लिए रवाना हुआ। छह दिनों की इस यात्रा में क्रूज लगभग आधा दर्जन शहरों से गुजरेगा। क्रूज की पहली यात्रा में जापान के 25 पयर्टक शामिल हैं। क्रूज की वापसी 13 सितंबर को वाराणसी से पटना के लिए होगी।
असम-बंगाल नेवीगेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा शुरू की इस टूर सर्विस में प्रति यात्री 11500 रुपए का भुगतान करना होगा। यात्रा के लिए कंपनी की वेबसाइट पर बुकिंग की जा सकती है। यह सेवा महीने में 4 बार मुहैया करायी जाएगी। इसके अलावा अक्टूबर से फरवरी तक पटना से कोलकाता के बीच महीने में दो बार और मार्च से मई तक कोलकाता से फरक्का के बीच चलाया जाएगा।
क्रूज की खाशियत-
एयरकंडिशनर कमरे-22 (डबल बेड-18 और सिंगल बेड-4)
पर्यटकों के रहने की व्यवस्था-40
सुविधाएं- क्रूज में कैंटीन, लॉन, कॉमन रूम, लॉबी, ई-लाइब्रेरी, आर्ट गैलरी, मेस, सन बाथ, कैफेटेरिया इत्यादि
क्रूज का स्टाफ-क्रूज पर दो कैप्टन समेत 26 सदस्यीय स्टाफ है।
इन शहरों से गुजरेगा क्रूज-मनेर, बक्सर, गाजीपुर, सारनाथ, रायनगर व चुनार

Monday, September 1, 2014

821 साल बाद फिर शुरू हुआ नालंदा विश्वविद्यालय


नालंदा-

देश के सर्वाधिक प्राचीन और अपने जमाने में दुनिया में सर्वाधिक लोकप्रिय नालंदा विश्वविद्यालय में 821 साल बाद सोमवार से दोबारा पढ़ाई शुरू हुई। नए विश्वविद्यालय का निर्माण प्राचीन विश्वविद्यालय के स्थान से 12 किलोमीटर दूर राजगीर में किया गया है।
विश्वविद्यालय में शिक्षा की शुरूआत 8 विद्यार्थियों के साथ की गई, जिनकी कक्षाएं राज्य सरकार के कला संस्कृति व पर्यटन विभाग के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गईं। पहले दिन इंट्रोडक्शन सेशन चला। कन्वेंशन सेंटर को 15 दिन के लिए किराए पर लिया गया है। 14 सितंबर को विश्वविद्यालय के औपचारिक उद्घाटन के बाद कक्षाएं प्रशासनिक भवन में लगेंगी।
रिसर्च पर जोर-

विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. गोपा सबरवाल ने बताया कि यहां कुल 7 विषय पढ़ाए जाएंगे। जापान और भूटान के एक-एक छात्र समेत कुल 15 छात्रों ने एडमिशन लिया है। 8 शिक्षक भी आ चुके हैं। उन्होंने आशा प्रकट की कि यहां विदेशों से और भी छात्र पहुंचेंगे। यहां पढ़ाई के अलावा रिसर्च पर विशेष जोर दिया जाएगा। 
2021 तक पूरा होगा स्थायी भवन का निर्माण-

विश्वविद्यालय की डीन डॉ. अंजना शर्मा ने बताया कि कक्षाओं और दफ्तर के लिए अस्थायी परिसर बन चुका है। करीब 242 एकड़ में स्थायी भवन का काम चल रहा है, जो 2021 तक पूरा होगा।
शिक्षा का केन्द्र नालंदा-
बता दें कि इस विश्वविद्यालय में 413 से 1193 ईसवी तक यानी 780 साल तक यहां पढ़ाई हुई। यहां पर बौद्ध धर्म, दर्शन, चिकित्सा, गणित, वास्तु, धातु और अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा दी जाती थी। नये विश्वविद्यालय में बिजनेस मैनेजमेंट, इकोलॉजी, पर्यावरण विज्ञान, इतिहास, इंटरनेशनल रिलेशंस एंड पीस इत्यादि भी पढ़ाए जाएंगे।

Monday, August 4, 2014

मैत्रेय परियोजना से बुद्धकालीन रामाभार झील को होगा नुकसान

कुशीनगर में प्रस्तावित मैत्रेय एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसके बनने से विकास की अपार संभावनाएं खुलेंगी। क्षेत्र से अशिक्षा, कुस्वास्थ्य, बेरोजगारी और गरीबी का खात्मा हो जाएगा। पर्यटन के क्षेत्र में भी यह स्थल विश्व के मानचित्र पर मजबूती से उभर कर सामने आएगा किंतु एक सच्चाई यह भी है कि बुद्ध कालीन रामसम्भार झील/रामाभार ताल समेत कई इतिहास भी हमेशा-हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगे।

बौद्ध कालीन रामाभार ताल भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद अंतिम संस्कार का साक्षी रहा है। लगभग २५०० वर्ष पूर्व जब बुद्ध ने अपने निर्वाण के लिए कुशीनगर का चुनाव किया था तब सभी चौंक पड़े थे। जब उन्होंने कारणों पर प्रकाश डाला तो सभी सन्न रह गए। वैशाख पूर्णिमा को निर्वाण के बाद तत्कालीन मल्ल राजा ने उनका दाह संस्कार रामाभार ताल के किनारे अपने पवित्रतम कुल देवी के स्थान के निकट कराया था। उस समय झील काफी विशाल थी। नेपाल की तराई से यहां पहुंचने वाली हिरण्यवती नदी विशाल झील के रूप में परिवर्तित हो गई थी और पुन: आगे नदी के रूप में आगे बढ़ती है। प्राचीन काल में झील का नाम रामसम्भार था। आगे चलकर इसे रामाभार ताल कहा जाने लगा जो सैंकड़ों एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसी के किनारे बुद्ध के दाह संस्कार स्थल पर निर्मित स्तूप का नाम रामाभार स्तूप पड़ गया। मल्ल राजकुमारों का मुकुट धारण संस्कार ताल के किनारे स्थित कुल देवी के स्थल पर होता था। इसलिए स्तूप को मुकुट बंधन चैत्य भी कहा जाता है। इसी झील के मध्य में १३ दिसंबर २०१३ को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने महत्वाकांक्षी मैत्रेय परियोजना का शिलान्यास किया था। फिलहाल निर्माण में कोई प्रगति तो नहीं दिखती किंतु भविष्य में परियोजना जमीन पर उतर जाने से हिरण्यवती सहित ऐतिहासिक झील का नामोनिशान मिट जाएगा।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सारनाथ मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् अजय श्रीवास्तव का कहना है कि संरक्षित स्मारक ३०० मीटर की दूरी तक निर्माण बिना अनुमति नहीं हो सकता। रामाभार ताल ऐतिहासिक है। इसकी रक्षा करना सरकार का भी दायित्व है।

Tuesday, July 15, 2014

बौद्ध भिक्षुओं ने धूमधाम से मनाया आषाढ़ पूर्णिमा


कुशीनगर-

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध बिहारों में पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर उपासक, उपासिकाओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक दान दिया।
बता दें कि बौद्ध अनुयायियों के लिए आषाढ़ी पूर्णिमा का बहुत बड़ा महत्व है। बौद्ध अनुयायियों के मुताबिक आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध अपनी मां के गर्भ में आये थे। बुद्ध ने इसी दिन राज दरबार का परित्याग किया था तथा ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ में प्रथम धम्मोपदेश दिया था। आषाढ़ी पूर्णिमा से ही तीन माह तक चलने वाले वर्षावास का प्रारम्भ होता है जिसकी परम्परा भगवान बुद्ध ने राजगीरी में प्रारम्भ किया था। इसी वजह से आज के दिन बौद्ध धर्मावलंबी विभिन्न प्रकार के समारोहों का आयोजन करते हैं।
कुशीनगर में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय बौद्ध भिक्षुओं के अतिरिक्त थाईलैंड से आये भिक्षुओं को दान दिया गया।

Thursday, July 10, 2014

चीनी पर्यटक दल ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा का दर्शन किया


कुशीनगर

चीन के एक पर्यटक दल ने सोमवार को कुशीनगर स्थित भगवान बुद्ध की प्रतिमा का दर्शन किया। पर्यटकों ने विभिन्न बौद्ध विहारों और स्तूपों का भी दर्शन किया।
पहली बार आए चीनी यात्री कुशीनगर में काफी खुश नजर आये। पर्यटकों ने कहा कि कुशीनगर के बारे में जैसा सुना था वैसा ही यहां पर शांति और प्राकृतिक छटा देखने को मिली। यहां की मिट्टी में आध्यात्मिक ऊर्जा का असीम भंडार है।
 चीनी पर्यटकों के 32 सदस्यीय दल में तिब्बती महायान संप्रदाय के एक भिक्षु व एक भिक्षुणी भी शामिल थे। उन्होंने सबसे पहले मुकुट बंधन चैत्य पहुंचे और यहां पर पूजा अर्चना किया। इसके बाद दल ने महापरिनिर्वाण बुद्ध विहार का दर्शन कर यहां बुद्ध की निर्वाण मुद्रा वाली ऐतिहासिक प्रतिमा के समक्ष भारत-चीन संबंधों की प्रगाढ़ता हेतु मंगल कामना की।